सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, 2 लाख रुपये से नीचे आया चांदी का भाव; जानें ताजा रेट

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को घरेलू वायदा बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक दोनों कीमती धातुओं पर दबाव देखने को मिला। खासतौर पर चांदी की कीमत में आई तेज गिरावट ने निवेशकों का ध्यान खींचा। घरेलू बाजार में चांदी का भाव एक बार फिर 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से नीचे पहुंच गया। वहीं सोना भी अपने पिछले बंद भाव की तुलना में कमजोर कारोबार करता नजर आया।
कीमती धातुओं में इस गिरावट के पीछे वैश्विक शेयर बाजारों में बिकवाली, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिका में ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद कमजोर होना जैसे कई कारण माने जा रहे हैं। इन परिस्थितियों ने निवेशकों की रणनीति को प्रभावित किया है। ऐसे में सोने-चांदी में निवेश करने वाले लोगों की नजर अब आने वाले आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक बाजार के रुख पर टिकी हुई है।
सोने की कीमत में 1,500 रुपये से ज्यादा की गिरावट
घरेलू वायदा बाजार में दिसंबर डिलीवरी वाला सोना शुक्रवार को गिरावट के साथ खुला। इसका पिछला बंद भाव 1,43,309 रुपये प्रति 10 ग्राम था। कारोबारी सत्र की शुरुआत में सोने की कीमत 1,251 रुपये यानी करीब 0.87 प्रतिशत गिरकर 1,42,058 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई।
दिन के कारोबार में बिकवाली का दबाव और बढ़ा। एक समय सोना 1,503 रुपये यानी लगभग 1.04 प्रतिशत टूटकर 1,41,806 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, निचले स्तर पर पहुंचने के बाद इसमें कुछ सुधार भी देखने को मिला।
कारोबार के दौरान सोने की कीमत में आई यह आंशिक रिकवरी गिरावट को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकी। उपलब्ध कारोबारी आंकड़ों के अनुसार, खबर लिखे जाने तक सोना 629 रुपये यानी 0.44 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,42,680 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।
इस उतार-चढ़ाव से साफ है कि सोने के बाजार में फिलहाल दबाव बना हुआ है। हालांकि, दिन के दौरान कीमतों में होने वाला बदलाव यह भी बताता है कि निवेशक निचले स्तर पर खरीदारी करने में दिलचस्पी दिखा सकते हैं।
चांदी की कीमत 2 लाख रुपये के नीचे फिसली
शुक्रवार को चांदी के बाजार में सोने की तुलना में ज्यादा तेज गिरावट देखने को मिली। दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी का पिछला बंद भाव 1,99,599 रुपये प्रति किलोग्राम था। कारोबार शुरू होते ही इसकी कीमत 3,012 रुपये यानी 1.50 प्रतिशत गिरकर 1,96,587 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।
इसके बाद बिकवाली का दबाव बढ़ने से चांदी की कीमत में और गिरावट आई। कारोबारी सत्र के दौरान एक समय यह 6,799 रुपये यानी करीब 3.40 प्रतिशत टूटकर 1,92,800 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर पर आ गई। इस गिरावट के साथ चांदी का भाव 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के महत्वपूर्ण स्तर से काफी नीचे पहुंच गया।
हालांकि, निचले स्तर से चांदी की कीमत में भी कुछ सुधार देखने को मिला। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यह 1.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,96,276 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई।
चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव उन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है जो इस धातु में कारोबार करते हैं। हालांकि, केवल एक दिन की गिरावट के आधार पर यह तय करना उचित नहीं होगा कि कीमतें आगे भी इसी तरह नीचे जाती रहेंगी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने-चांदी पर दबाव
घरेलू बाजार में गिरावट के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों कीमती धातुएं कमजोर रहीं। वैश्विक बाजार में सोने की कीमत करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंचने से निवेशकों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार में सोना लगभग 0.65 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,034 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया। वहीं चांदी की कीमत करीब 1.30 प्रतिशत गिरकर 54.29 डॉलर प्रति औंस के आसपास रही।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। भारत में सोने और चांदी की घरेलू कीमतें वैश्विक भाव के अलावा रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात लागत तथा स्थानीय मांग जैसे कारकों से प्रभावित होती हैं। इसलिए विदेशी बाजार में गिरावट का असर घरेलू कीमतों पर किस हद तक पड़ेगा, यह कई परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
कच्चे तेल और ब्याज दरों ने बढ़ाई चिंता
सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव के पीछे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा सकता है। यदि महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है, तो केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है।
अमेरिका में ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने की आशंका भी सोने की कीमतों के लिए चुनौती बन रही है। सोना नियमित ब्याज नहीं देता, इसलिए जब ब्याज देने वाले निवेश विकल्प आकर्षक बने रहते हैं, तो कुछ निवेशक सोने से दूरी बना सकते हैं।
इसके अलावा, वैश्विक शेयर बाजारों में बिकवाली और निवेशकों की बदलती जोखिम लेने की क्षमता भी कीमती धातुओं की मांग को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने पर सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में भी देखा जाता है। इसी वजह से इसकी कीमतों में आगे का रुख कई विपरीत कारकों के संतुलन पर निर्भर करेगा।
डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर रहेगी नजर
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों, महंगाई के रुझान और केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति से जुड़े संकेतों पर रहेगी। इन आंकड़ों से यह समझने में मदद मिल सकती है कि ब्याज दरों में कटौती की संभावना कब और कितनी बन सकती है।
यदि अमेरिकी डॉलर कमजोर पड़ता है और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में नरमी आती है, तो सोने और चांदी को कुछ समर्थन मिल सकता है। दूसरी ओर, डॉलर मजबूत होने और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ने पर इन धातुओं पर दबाव जारी रह सकता है।
इसलिए बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी होगा। घरेलू कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय जोखिम और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना अधिक उपयोगी हो सकता है।
रिकॉर्ड ऊंचाई से काफी नीचे आए सोना और चांदी
इस साल की शुरुआत में सोने और चांदी दोनों ने घरेलू वायदा बाजार में ऐतिहासिक ऊंचाई दर्ज की थी। सोने की कीमत एमसीएक्स पर 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। वहीं चांदी ने 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक उच्च स्तर छुआ था।
मौजूदा भाव की तुलना रिकॉर्ड स्तरों से करने पर दोनों धातुओं में बड़ी गिरावट दिखाई देती है। सोना अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ चुका है, जबकि चांदी की कीमत भी अपने रिकॉर्ड भाव के मुकाबले लगभग आधे स्तर के आसपास पहुंच गई है।
हालांकि, ऊंचे स्तर से कीमतों का नीचे आना अपने आप में इस बात की गारंटी नहीं है कि अब सोना या चांदी सस्ता निवेश बन गया है। कीमतों का आगे का रुख वैश्विक मांग, ब्याज दरों, डॉलर, महंगाई और निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगा।
क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा?
सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के बाद खरीदारों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह खरीदारी का सही मौका है। इसका जवाब हर निवेशक के लिए अलग हो सकता है। जो लोग आभूषण खरीदना चाहते हैं, उन्हें बाजार भाव के साथ स्थानीय मेकिंग चार्ज, जीएसटी और अन्य लागू लागतों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
वहीं वायदा बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों को कीमतों में तेजी से होने वाले उतार-चढ़ाव और संभावित नुकसान का आकलन करना चाहिए। रिकॉर्ड स्तर से गिरावट को देखकर बिना योजना के निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।
फिलहाल सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी के बीच वैश्विक आर्थिक संकेत सबसे महत्वपूर्ण बने हुए हैं। आने वाले कारोबारी सत्रों में डॉलर, कच्चे तेल, अमेरिकी ब्याज दरों और निवेशकों की मांग से तय होगा कि कीमती धातुओं में गिरावट जारी रहती है या कीमतों को दोबारा सहारा मिलता है।
