मध्य प्रदेश में डिंडौरी में 9 घंटे में 6 इंच बारिश, नर्मदा उफनी; मंडला में 20 एकड़ शिमला मिर्च की फसल बर्बाद

Untitled-5

मध्य प्रदेश में मानसून का असर एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। डिंडौरी जिले में शनिवार रात से रविवार सुबह तक हुई मूसलधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। करीब नौ घंटे के दौरान जिले में लगभग 6 इंच बारिश दर्ज की गई। भारी बारिश के कारण नर्मदा नदी और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। बजाग, करंजिया और समनापुर ब्लॉक में कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है।

भारी बारिश के कारण डिंडौरी जिला मुख्यालय का जबलपुर और मंडला से सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है। मंडला-डिंडौरी नेशनल हाईवे पर खरमेर नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने लगा। इसके चलते सक्का गांव के पास वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। पानी का बहाव तेज होने के कारण प्रशासन ने लोगों को जलभराव वाले रास्तों पर जाने से बचने की सलाह दी है।

नर्मदा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से नदी किनारे बसे निचले इलाकों में भी खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया है। नदी के किनारे खतरे के दायरे में रह रहे सात परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर रैन बसेरा में शिफ्ट किया गया है। प्रशासन की ओर से लोगों से नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की अपील की जा रही है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक मध्य प्रदेश में आने वाले दिनों में बारिश का दौर और तेज हो सकता है। प्रदेश के ऊपर से ट्रफ लाइन गुजर रही है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल और आसपास के क्षेत्रों में बने चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से कम दबाव का क्षेत्र विकसित हुआ है। इसके मजबूत होने पर मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की स्थिति बन सकती है। दतिया, रीवा और सीधी में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

इसी बीच मंडला जिले में हुई तेज बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मोहगांव तहसील के डोंगरगांव स्थित लोहान कृषि फार्म में करीब 20 एकड़ क्षेत्र में लगी शिमला मिर्च की फसल तेज पानी के बहाव से बुरी तरह प्रभावित हुई। खेत में पानी इतनी तेजी से आया कि तैयार फसल के साथ ड्रिप सिंचाई की पाइपलाइन और मल्चिंग भी बह गई।

लोहान कृषि फार्म में आधुनिक तकनीक के जरिए शिमला मिर्च की खेती की गई थी। फसल के लिए ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग व्यवस्था तैयार की गई थी, जिससे बेहतर उत्पादन और पानी की बचत की उम्मीद थी। बारिश से पहले फसल अच्छी स्थिति में थी, लेकिन अचानक तेज पानी आने से कई पौधे उखड़ गए और खेत में बिछी मल्चिंग भी क्षतिग्रस्त हो गई।

किसान के मुताबिक फसल और कृषि उपकरणों को हुए नुकसान से उसे बड़ा आर्थिक झटका लगा है। अब दोबारा खेती तैयार करने और सिंचाई व्यवस्था स्थापित करने में अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। किसान ने प्रशासन और कृषि विभाग से मौके पर सर्वे कराने तथा फसल के साथ ड्रिप पाइपलाइन और मल्चिंग के नुकसान का भी आकलन करने की मांग की है।

लगातार हो रही भारी बारिश ने एक बार फिर किसानों और प्रशासन दोनों की चुनौती बढ़ा दी है। एक ओर नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा है, वहीं दूसरी ओर खेतों में पानी भरने और तेज बहाव से फसलों को नुकसान हो रहा है। अब प्रभावित किसानों और ग्रामीणों की नजर प्रशासन की राहत और सर्वे प्रक्रिया पर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *