सोना-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल, वैश्विक तनाव और कच्चे तेल में गिरावट से बढ़ी निवेशकों की खरीदारी

मंगलवार को घरेलू सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में मजबूत तेजी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के चलते दोनों कीमती धातुओं में अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों का रुझान एक बार फिर सोने और चांदी की ओर बढ़ा दिया, जिससे दोनों धातुओं के भाव में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने के वायदा अनुबंध में कारोबार के दौरान एक प्रतिशत से अधिक की तेजी देखने को मिली। कारोबार के दौरान सोने ने 1,42,848 रुपये प्रति 10 ग्राम का इंट्राडे हाई छू लिया। इसके बाद भी कीमतें मजबूत बनी रहीं और दिन के कारोबार में सोना ऊंचे स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। दिन की शुरुआत में सोने ने अपेक्षाकृत निचले स्तर पर कारोबार शुरू किया था, लेकिन खरीदारी बढ़ने के साथ इसमें लगातार मजबूती आती गई।
चांदी की कीमतों में भी शानदार तेजी दर्ज की गई। सितंबर डिलीवरी वाले चांदी के वायदा अनुबंध में डेढ़ प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखने को मिली और कारोबार के दौरान इसकी कीमत 2,21,780 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। शुरुआती कारोबार में चांदी अपेक्षाकृत कम स्तर पर थी, लेकिन बाजार में मजबूत मांग और वैश्विक संकेतों के चलते इसमें भी तेजी लगातार बनी रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू बाजार में आई यह तेजी पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय रुझानों के अनुरूप रही। वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने के बाद निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई है। हालांकि पश्चिम एशिया में जारी तनाव अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, जिसके कारण निवेशक जोखिम वाले निवेश विकल्पों की बजाय सुरक्षित माने जाने वाले निवेश साधनों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे समय में सोना और चांदी पारंपरिक रूप से सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प माने जाते हैं, जिससे इनकी मांग बढ़ जाती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों को उस समय अतिरिक्त समर्थन मिला जब तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इससे वैश्विक महंगाई को लेकर कुछ राहत की उम्मीद बनी, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों को सतर्क बनाए रखा। बाजार में यह धारणा बनी हुई है कि यदि वैश्विक तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो सुरक्षित निवेश की मांग और बढ़ सकती है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ सप्ताह से सोना और चांदी दोनों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसकी प्रमुख वजह पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियां और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता है। निवेशक लगातार इस बात का आकलन कर रहे हैं कि भविष्य में ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला लिया जा सकता है और इसका असर कीमती धातुओं पर किस प्रकार पड़ेगा।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं तो सोने जैसे ऐसे निवेश साधनों की मांग पर कुछ दबाव पड़ सकता है, क्योंकि इन पर ब्याज नहीं मिलता। वहीं यदि ब्याज दरों में कटौती की संभावना मजबूत होती है या वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में फिर से सोने और चांदी की ओर आकर्षित होते हैं। फिलहाल बाजार की नजर वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की चाल और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों पर बनी हुई है, जो आने वाले दिनों में कीमती धातुओं की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
