सोना-चांदी में सोमवार को जोरदार तेजी, डॉलर कमजोर पड़ते ही चमकी कीमती धातुओं की कीमतें

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार में दोनों कीमती धातुओं ने तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत की, जिससे निवेशकों और सर्राफा बाजार से जुड़े कारोबारियों का ध्यान एक बार फिर इन पर केंद्रित हो गया। शुरुआती कारोबार में सोने और चांदी दोनों ने ऊंचे स्तर को छुआ और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों का असर घरेलू बाजार में भी साफ दिखाई दिया।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने के अगस्त 2026 डिलीवरी वाले वायदा अनुबंध ने पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में मजबूत शुरुआत की। शुरुआती कारोबार के दौरान कीमतों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई और कारोबार के दौरान सोना ऊपरी स्तर तक पहुंचा। हालांकि बाद में इसमें हल्का उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में सकारात्मक रुख बना रहा। निवेशकों का मानना है कि सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ने से इसकी कीमतों को समर्थन मिल रहा है।
चांदी ने भी सोमवार को शानदार प्रदर्शन किया। सितंबर डिलीवरी वाले वायदा अनुबंध में शुरुआती कारोबार से ही मजबूती देखने को मिली और कीमतों में लगभग एक प्रतिशत तक का उछाल दर्ज किया गया। कारोबार के दौरान चांदी ने अपना उच्चतम स्तर भी छुआ, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बाजार में खरीदारी का रुझान मजबूत बना हुआ है। औद्योगिक मांग और वैश्विक संकेतों ने भी चांदी की कीमतों को सहारा दिया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी दोनों सकारात्मक दायरे में कारोबार करते दिखाई दिए। वैश्विक निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ने और अमेरिकी डॉलर में कमजोरी आने से कीमती धातुओं की मांग को बल मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि जब डॉलर कमजोर होता है तो अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना और चांदी अपेक्षाकृत सस्ते हो जाते हैं, जिससे इनकी खरीद बढ़ जाती है और कीमतों में तेजी देखने को मिलती है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार डॉलर इंडेक्स में आई कमजोरी इस तेजी की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। हाल के वैश्विक घटनाक्रमों के बाद अमेरिकी डॉलर की मांग में कमी आई है, जिससे डॉलर इंडेक्स दबाव में है। इसका सीधा फायदा सोने और चांदी जैसी सुरक्षित निवेश वाली परिसंपत्तियों को मिला है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव और निवेशकों की बदलती रणनीति भी कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर रही है।
दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का रुख जारी है। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों में कमजोरी दर्ज की गई, जिससे वैश्विक कमोडिटी बाजार में नई हलचल देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर मुद्रास्फीति की उम्मीदों और मुद्रा बाजार पर भी पड़ता है, जिसका अप्रत्यक्ष प्रभाव सोने और चांदी की चाल पर दिखाई देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, डॉलर इंडेक्स की दिशा और वैश्विक कमोडिटी बाजार के रुझान पर बनी रहेगी। यदि डॉलर में कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता का माहौल जारी रहता है, तो सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव के साथ मजबूती देखने को मिल सकती है। ऐसे में निवेशकों को बाजार की चाल पर लगातार नजर रखते हुए सोच-समझकर निवेश का निर्णय लेना चाहिए।
