अमेरिका-ईरान तनाव से शेयर बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 1,677 अंक टूटा, निवेशकों के 8 लाख करोड़ रुपये डूबे

वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन घरेलू बाजार में निवेशकों ने बड़े पैमाने पर बिकवाली की, जिसके कारण प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। पिछले कई कारोबारी सत्रों से जारी तेजी का सिलसिला भी इसी के साथ थम गया और पूरे बाजार में कमजोरी का माहौल देखने को मिला।
कारोबार की शुरुआत से ही बाजार दबाव में दिखाई दिया। शुरुआती घंटों में हल्की गिरावट के साथ खुलने के बाद बिकवाली लगातार बढ़ती गई और दिनभर निवेशकों की धारणा कमजोर बनी रही। दोपहर तक बाजार में गिरावट और तेज हो गई, जिससे प्रमुख सूचकांकों ने दिन के सबसे निचले स्तर को छू लिया। हालांकि अंतिम घंटों में कुछ रिकवरी की कोशिश जरूर हुई, लेकिन बाजार लाल निशान में ही बंद हुआ। यह गिरावट पिछले कई महीनों के दौरान सबसे कमजोर कारोबारी सत्रों में से एक मानी जा रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयातित कच्चे तेल पर निर्भर है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर महंगाई, आयात लागत और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है। यही वजह रही कि निवेशकों ने जोखिम कम करने के उद्देश्य से कई क्षेत्रों में मुनाफावसूली और बिकवाली को प्राथमिकता दी।
इस गिरावट का असर केवल प्रमुख सूचकांकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक बाजार भी दबाव में दिखाई दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी उल्लेखनीय कमजोरी देखने को मिली। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, एफएमसीजी, ऑटो, ऑयल एंड गैस, इंफ्रास्ट्रक्चर और मीडिया जैसे प्रमुख सेक्टरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। बैंकिंग शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखने को मिला, जिससे पूरे बाजार की धारणा और कमजोर हो गई। हालांकि धातु और फार्मा क्षेत्र में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही, जिससे इन सेक्टरों ने कुछ हद तक संतुलन बनाए रखा।
बाजार में आई इस तेज गिरावट का सबसे बड़ा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। कारोबार समाप्त होने तक सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में लाखों करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। इससे निवेशकों की संपत्ति में एक ही दिन में भारी गिरावट आई। लगातार बिकवाली के कारण निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई और कई लोगों ने नए निवेश से फिलहाल दूरी बनाए रखना उचित समझा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करेंगी। यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होता है और ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौटती है तो बाजार में सुधार की संभावना बन सकती है। फिलहाल निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे घबराहट में निर्णय लेने के बजाय लंबी अवधि की रणनीति अपनाएं, अपने निवेश पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखें और वैश्विक आर्थिक घटनाओं पर लगातार नजर रखें।
