छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के भैरामगढ़–इंद्रावती क्षेत्र की घनी पहाड़ियों में शुक्रवार को सुरक्षाकर्मियों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) की एक टीम ने हथियारबंद माओवादी कैडरों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिलने के बाद नक्सल विरोधी अभियान शुरू किया था, इसी दौरान गोलीबारी शुरू हो गई।
सुबह से रुक-रुक कर फायरिंग की खबरें मिल रही हैं। पुलिस अधिकारियों ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि हालात को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल मौके पर भेजे गए हैं और पूरे इलाके को घेर लिया गया है। ऑपरेशन अभी जारी है।
अधिकारियों के अनुसार, डीआरजी की टीम जंगल के भीतर काफी अंदर तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण बेहद सतर्कता बरती जा रही है और किसी भी तरह के नुकसान या बरामदगी की विस्तृत जानकारी तलाशी अभियान पूरा होने के बाद ही सामने आ सकेगी।
बीजापुर जिला लंबे समय से एंटी-नक्सल ऑपरेशंस का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। हाल के वर्षों में यहां सबसे ज्यादा माओवादियों को ढेर किया गया है। कुछ ही सप्ताह पहले बस्तर संभाग में अलग-अलग मुठभेड़ों के दौरान कई माओवादी मारे गए थे, जिससे वर्ष 2025 में पूरे राज्य में मारे गए माओवादियों की संख्या 280 से अधिक हो चुकी है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अकेले बीजापुर जिले में 2025 के दौरान 144 माओवादियों को मार गिराया गया, जबकि 500 से अधिक को गिरफ्तार किया गया और 560 से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।
राज्य पुलिस, डीआरजी, सीआरपीएफ की कोबरा यूनिट और अन्य केंद्रीय बलों के बीच बेहतर तालमेल के चलते माओवादी नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचा है। इससे न केवल नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में कमी आई है, बल्कि केंद्र सरकार के मार्च 2026 तक वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के लक्ष्य की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
