शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत, अमेरिकी टैरिफ और महंगे कच्चे तेल के दबाव में सेंसेक्स-निफ्टी फिसले

stock-market-1002

भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को कमजोर शुरुआत की और शुरुआती कारोबार के दौरान प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी चिंताओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दबाव का असर घरेलू बाजार की निवेशक धारणा पर साफ नजर आया। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि कई प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली का माहौल देखने को मिला। निवेशक फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम और ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

कारोबार की शुरुआत के साथ ही सेंसेक्स में दो सौ अंकों से अधिक की गिरावट देखी गई, जबकि निफ्टी भी शुरुआती घंटे में कमजोर बना रहा। सबसे अधिक दबाव फार्मा सेक्टर पर दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी आशंकाओं का असर दवा कंपनियों के शेयरों पर पड़ा है, जिससे फार्मा इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा आईटी, रियल एस्टेट, ऑयल एंड गैस, निजी बैंक, वित्तीय सेवाएं, सार्वजनिक उपक्रम और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयरों में भी कमजोरी रही।

हालांकि बाजार के सभी सेक्टर दबाव में नहीं रहे। ऑटोमोबाइल, मेटल, एफएमसीजी, मीडिया, डिफेंस और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे कुछ सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे निवेशकों को सीमित राहत मिली। बाजार में यह मिश्रित रुख इस बात का संकेत देता है कि निवेशक फिलहाल चुनिंदा क्षेत्रों में ही निवेश करना पसंद कर रहे हैं, जबकि वैश्विक जोखिम वाले सेक्टरों में सतर्कता बरती जा रही है।

सेंसेक्स में कुछ चुनिंदा कंपनियों के शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए, जबकि आईटी, बैंकिंग, धातु और फार्मा क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का दबाव बना रहा। इससे यह स्पष्ट हुआ कि केवल बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयर भी निवेशकों की सतर्कता का सामना कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख भी पूरी तरह सकारात्मक नहीं रहा। एशिया के कुछ प्रमुख शेयर बाजारों में बढ़त देखने को मिली, जबकि कुछ बाजारों में कमजोरी बनी रही। अमेरिकी बाजारों का पिछला कारोबारी सत्र भी दबाव में समाप्त हुआ था, जिसका असर एशियाई बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी पड़ा। वैश्विक निवेशकों के बीच फिलहाल भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंता बनी हुई है।

बाजार विश्लेषकों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। ईरान-अमेरिका तनाव के बीच लाल सागर क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई, चालू खाते के संतुलन और कॉर्पोरेट लागत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाते हुए बाजार में सीमित जोखिम ले रहे हैं। आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों, कच्चे तेल की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बाजार की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed