सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल, गोल्ड 1.41 लाख के पार पहुंचा, जानिए आगे बढ़ेंगे या घटेंगे भाव

मंगलवार को घरेलू कमोडिटी बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में अच्छी तेजी देखने को मिली। लगातार उतार-चढ़ाव के बीच दोनों कीमती धातुओं ने मजबूत रिकवरी दर्ज की, जिससे निवेशकों और कारोबारियों के बीच नई उम्मीद जगी। कारोबार की शुरुआत से ही खरीदारी का माहौल बना रहा, जिसके कारण सोना और चांदी दोनों पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में आधे प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने का अगस्त डिलीवरी वाला वायदा अनुबंध तेजी के साथ खुला और कारोबार के दौरान 1,41,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर गया। शुरुआती कारोबार में सोने ने दिन का निचला स्तर छूने के बाद लगातार मजबूती दिखाई और ऊपरी स्तर तक पहुंच गया। बाजार में खरीदारी बढ़ने से निवेशकों का रुझान एक बार फिर सोने की ओर देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकेतों और निवेशकों की गतिविधियों के कारण सोने में यह तेजी देखने को मिली।
चांदी की कीमतों में भी सकारात्मक रुख बना रहा। सितंबर डिलीवरी वाला वायदा अनुबंध पिछले बंद भाव की तुलना में मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। कारोबार के दौरान चांदी ने भी अपने दिन के उच्च स्तर को छुआ, जबकि निचले स्तर से इसमें अच्छी रिकवरी दर्ज की गई। औद्योगिक मांग और निवेशकों की खरीदारी के कारण चांदी के भाव में मजबूती बनी रही, हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहा।
वैश्विक बाजारों की बात करें तो वहां मिश्रित रुख देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में हल्की बढ़त दर्ज की गई, जबकि चांदी में मामूली कमजोरी देखने को मिली। विदेशी बाजारों के संकेतों का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दिया, लेकिन स्थानीय स्तर पर खरीदारी के कारण सोने और चांदी दोनों ने मजबूती बनाए रखी। निवेशकों की नजरें वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और वित्तीय संकेतकों पर बनी हुई हैं, जो आने वाले दिनों में इन धातुओं की दिशा तय कर सकते हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल तेजी के बावजूद आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका में सरकारी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड को माना जा रहा है। हाल के दिनों में अमेरिकी 5 वर्षीय, 10 वर्षीय और 30 वर्षीय बॉन्ड की यील्ड में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जब बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तब निवेशकों का रुझान अक्सर सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों से हटकर बॉन्ड की ओर बढ़ने लगता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर बनी रहती है और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आता, तो सोने और चांदी की कीमतों में निकट भविष्य में दबाव देखने को मिल सकता है। हालांकि भू-राजनीतिक तनाव, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां भी इन धातुओं की कीमतों को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक बने रहेंगे। ऐसे में निवेशकों को बाजार के रुझानों पर लगातार नजर रखते हुए सोच-समझकर निवेश संबंधी निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है।
