सोने में हल्की तेजी, चांदी में गिरावट; अमेरिकी फेड के फैसले के बाद बुलियन बाजार में सतर्क कारोबार

घरेलू सर्राफा और कमोडिटी बाजार में गुरुवार की शुरुआत मिलेजुले रुख के साथ हुई। कारोबार के शुरुआती घंटों में सोने की कीमतों में हल्की मजबूती देखने को मिली, जबकि चांदी दबाव में कारोबार करती नजर आई। निवेशकों की नजरें वैश्विक आर्थिक संकेतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के हालिया ब्याज दर संबंधी फैसले पर टिकी हुई हैं, जिसके कारण बुलियन बाजार में फिलहाल सतर्क माहौल बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों और महंगाई को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक सोने और चांदी की कीमतों में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के अक्टूबर 2026 वायदा अनुबंध की शुरुआत पिछले बंद भाव के मुकाबले मामूली बढ़त के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सोने ने सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव दिखाया और दिन के दौरान हल्की तेजी के साथ कारोबार करता रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं और वैश्विक बाजार से मिलने वाले अगले संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
वहीं चांदी के सितंबर 2026 वायदा अनुबंध में शुरुआत से ही कमजोरी दिखाई दी। शुरुआती कारोबार में इसकी कीमत पिछले बंद स्तर से नीचे खुली और दिन के पहले सत्र में करीब आधा प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान चांदी ने निचले और ऊपरी दोनों स्तरों को छुआ, लेकिन पूरे सत्र में दबाव बना रहा। इससे स्पष्ट होता है कि निवेशकों का रुझान फिलहाल चांदी की तुलना में अधिक सतर्क बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की चाल लगभग इसी तरह रही। वैश्विक कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में हल्की मजबूती देखने को मिली, जबकि चांदी में गिरावट का रुख बना रहा। विदेशी बाजारों के संकेतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दिया, जिसके चलते एमसीएक्स पर दोनों धातुओं की कीमतों में सीमित दायरे में कारोबार हुआ।
बुलियन बाजार में इस समय सबसे बड़ा प्रभाव अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के फैसले का देखा जा रहा है। हाल ही में फेड ने अपनी प्रमुख ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रखने का निर्णय लिया, लेकिन इस फैसले के दौरान नीति निर्धारकों के बीच मतभेद भी सामने आए। कुछ सदस्यों ने महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने का समर्थन किया। इस विभाजित रुख ने निवेशकों के बीच यह संभावना मजबूत कर दी है कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में ब्याज दरें बढ़ती हैं तो इसका असर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की मांग पर पड़ सकता है, क्योंकि ऊंची ब्याज दरों के दौरान निवेशक अन्य वित्तीय साधनों की ओर आकर्षित होते हैं। फिलहाल बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और निवेशक आर्थिक आंकड़ों, महंगाई के रुझान तथा केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों पर नजर बनाए हुए हैं। ऐसे में निकट भविष्य में सोने और चांदी की कीमतों में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।
