जम्मू सीमा पर अमित शाह का दौरा, बीएसएफ जवानों के शौर्य को किया नमन, कल्याण और आधुनिकीकरण पर दिया जोर
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को जम्मू दौरे के दौरान भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित बीएसएफ की बॉर्डर आउट पोस्ट ‘गुरनाम’ और ‘बोबिया’ का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सीमा की सुरक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को ‘अजेय प्रहरी’ स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। गृह मंत्री ने बीओपी ‘बोबिया’ परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया और जवानों के साथ संवाद कर उनका मनोबल बढ़ाया।
दौरे के दौरान अमित शाह ने सीमा सुरक्षा बल के जवानों के कल्याण से जुड़ी लगभग 7 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं में सोलर वॉटर हीटर, सोलर पावर प्लांट और अधिकारियों के लिए नवनिर्मित मेस शामिल हैं, जिनका उद्देश्य दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही उन्होंने बीएसएफ के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 242 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया। इस मौके पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, केंद्रीय गृह सचिव, खुफिया ब्यूरो के निदेशक, बीएसएफ महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बीएसएफ जवानों को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि जब भी वे कच्छ, राजस्थान या जम्मू-कश्मीर जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में स्थित सीमा चौकियों पर जाते हैं, तो वहां तैनात जवानों से कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और समर्पण की प्रेरणा लेकर लौटते हैं। उन्होंने कहा कि बीएसएफ जवान दिन-रात कठिन परिस्थितियों में भी पूरी निष्ठा के साथ देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं और यही उनका सबसे बड़ा परिचय है।
अमित शाह ने बीएसएफ के 60 वर्षों के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बल ने अपने पराक्रम और शौर्य से देशवासियों के मन में अटूट विश्वास कायम किया है। जब-जब सीमाओं पर घुसपैठ या सुरक्षा को चुनौती देने की कोशिश हुई, बीएसएफ एक मजबूत और अभेद्य दीवार की तरह खड़ा रहा। उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान बीएसएफ के शौर्य ने बल के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ा है। इस अभियान में जम्मू-कश्मीर फ्रंटियर द्वारा 118 पाकिस्तानी चौकियों और तीन आतंकी लॉन्च पैड को ध्वस्त किया गया। इस दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज अहमद और सिपाही दीपक चिंखाम को वीर चक्र से सम्मानित किया गया।
गृह मंत्री ने कहा कि बीएसएफ की भूमिका केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि मणिपुर जैसे पूर्वोत्तर राज्यों, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के माओवादी प्रभावित इलाकों तथा प्राकृतिक आपदाओं के समय भी बल ने अद्वितीय साहस और सेवा भाव का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि आज की बदलती चुनौतियों को देखते हुए सीमा सुरक्षा में तकनीकी आधुनिकीकरण बेहद जरूरी है। बीएसएफ का 61वां वर्ष बल के आधुनिकीकरण, जवानों और उनके परिवारों के कल्याण को समर्पित रहेगा।
अमित शाह ने भरोसा दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार सुरक्षा बलों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बीएसएफ जवानों के लिए जल्द ही एक नई विशेष कल्याणकारी योजना लाई जाएगी और आधुनिक तकनीक से सीमा सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने सीमा सुरक्षा में महिला कर्मियों के योगदान की भी सराहना की और जवानों के साथ दोपहर का भोजन कर उनका उत्साह बढ़ाया।
