अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प पूरा, यात्रियों को मिल रही आधुनिक सुविधाएं

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मृत भारत स्टेशन योजना के तहत भारतीय रेलवे ने देशभर में 172 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को संसद को यह जानकारी देते हुए बताया कि इस महत्वाकांक्षी योजना का मकसद न केवल रेलवे स्टेशनों की सूरत बदलना है, बल्कि यात्रियों के लिए सुविधाजनक, सुरक्षित और आधुनिक यात्रा अनुभव सुनिश्चित करना भी है। इस योजना के जरिए स्टेशनों और उनके आसपास के क्षेत्रों को नए सिरे से विकसित किया जा रहा है, ताकि वे शहर के दोनों हिस्सों को जोड़ने वाले आधुनिक ट्रांजिट हब के रूप में उभर सकें।

रेल मंत्री ने कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना में यात्रियों की वास्तविक जरूरतों को केंद्र में रखा गया है। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्टेशनों पर चौड़े फुटओवर ब्रिज बनाए गए हैं, जिनमें एस्केलेटर और लिफ्ट की सुविधा दी गई है, ताकि बुजुर्गों, दिव्यांगों और भारी सामान के साथ यात्रा करने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। इसके साथ ही बेहतर पार्किंग व्यवस्था, आधुनिक पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम और साफ-सुथरे वेटिंग हॉल विकसित किए गए हैं, जिससे स्टेशन पर समय बिताना पहले की तुलना में अधिक आरामदायक हो गया है।

अमृत भारत स्टेशन योजना की एक खास विशेषता मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन है। रेल मंत्री के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य रेलवे को बस, मेट्रो, ऑटो और अन्य परिवहन साधनों से बेहतर तरीके से जोड़ना है, ताकि यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने में आसानी हो। स्टेशनों पर कियोस्क की व्यवस्था भी की गई है, जहां यात्रियों को रोजमर्रा की जरूरत का सामान और विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे स्टेशन केवल यात्रा का स्थान न रहकर एक सुविधाजनक सार्वजनिक केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं।

अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि इस योजना में टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल समाधानों को भी प्राथमिकता दी गई है। ऊर्जा दक्षता, हरित क्षेत्र और आधुनिक ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही, कई स्टेशनों को सिटी सेंटर की अवधारणा के तहत विकसित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय व्यापार, रोजगार और शहरी विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। अब तक देशभर में 1,337 रेलवे स्टेशनों को इस योजना के तहत पुनर्विकास के लिए चिन्हित किया जा चुका है।

रेल मंत्री ने रेलवे ब्रिज की सुरक्षा को लेकर भी अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारतीय रेलवे ब्रिज की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। वर्ष 2022 से दिसंबर 2025 तक देशभर में 8,626 रेलवे ब्रिज की मरम्मत, मजबूती और पुनर्निर्माण का कार्य किया गया है। रेलवे के पास ब्रिज निरीक्षण की एक सुदृढ़ प्रणाली मौजूद है, जिसके तहत हर ब्रिज का साल में कम से कम दो बार निरीक्षण किया जाता है। एक निरीक्षण मानसून से पहले और दूसरा विस्तृत निरीक्षण मानसून के बाद किया जाता है। कुछ संवेदनशील ब्रिज की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त निरीक्षण भी कराए जाते हैं, जिनका फैसला चीफ ब्रिज इंजीनियर लेते हैं।

सबवे और रोड अंडर ब्रिज पर भी विशेष निगरानी रखी जाती है। मानसून से पहले और बाद में इनके निरीक्षण के साथ जलजमाव की समस्या को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाते हैं, ताकि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा बनी रहे। रेल मंत्री ने बताया कि ब्रिज पुनर्वास से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं भारतीय रेलवे ब्रिज मैनुअल के अनुसार की जाती हैं। गुणवत्ता आश्वासन, निरीक्षण और परीक्षण योजनाओं का सख्ती से पालन किया जाता है और समय-समय पर तकनीकी ऑडिट कर आवश्यक सुधार भी किए जाते हैं। रेलवे का कहना है कि इन प्रयासों से देश में रेल यात्रा को और अधिक सुरक्षित, आधुनिक और भरोसेमंद बनाया जा रहा है।

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