ATF की कीमत में लगातार दूसरे महीने बड़ी बढ़ोतरी, एयरलाइंस की लागत बढ़ी, हवाई किराया महंगा होने के संकेत

46e7eb45-0cea-468d-af10-326fe7002f70

देश में विमानन क्षेत्र के लिए एक बार फिर ईंधन महंगा हो गया है। घरेलू एयरलाइंस के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ की कीमत में लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी की गई है। नई दरों के अनुसार एटीएफ की कीमत में 6.28 रुपये प्रति लीटर यानी लगभग 5.46 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस बढ़ोतरी के बाद एटीएफ का दाम 115 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गया है। लगातार दो महीनों से बढ़ती कीमतों ने एयरलाइंस कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ने की आशंका को और मजबूत कर दिया है।

जुलाई में एटीएफ की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी, जिसके बाद इसका दाम 110 रुपये प्रति लीटर तक आ गया था। हालांकि इसके बाद अगस्त में कीमत बढ़ाकर 115 रुपये प्रति लीटर कर दी गई और अब सितंबर की नई समीक्षा में इसमें फिर 6.28 रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर दिया गया है। इस तरह जुलाई में मिली राहत पूरी तरह खत्म हो चुकी है और एटीएफ की कीमत जुलाई के स्तर से 11.28 रुपये प्रति लीटर अधिक हो गई है।

एटीएफ विमानन कंपनियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण परिचालन खर्चों में से एक माना जाता है। किसी भी एयरलाइन के कुल संचालन खर्च का बड़ा हिस्सा विमान ईंधन पर होता है। इसलिए एटीएफ की कीमतों में लगातार वृद्धि का सीधा असर एयरलाइंस के खर्च और उनकी लाभप्रदता पर पड़ सकता है। यदि ईंधन की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो एयरलाइंस कंपनियां अतिरिक्त लागत का कुछ हिस्सा यात्रियों पर डाल सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। त्योहारों और छुट्टियों के मौसम में यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे समय में ईंधन की बढ़ती कीमतें एयरलाइंस के लिए अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकती हैं, जिससे टिकट की कीमतों में बदलाव संभव है।

सरकार पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों की समीक्षा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की औसत कीमतों के आधार पर नियमित अंतराल पर करती है। इसी प्रक्रिया के तहत हालिया समीक्षा में नई दरें लागू की गई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर विमान ईंधन की कीमतों पर भी देखने को मिलता है।

इससे पहले हुई समीक्षा में एटीएफ के निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी यानी एसएईडी 19.5 रुपये प्रति लीटर तय की गई थी। वहीं डीजल के निर्यात पर यह शुल्क 24 रुपये प्रति लीटर रखा गया था, जबकि पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क शून्य किया गया था। सरकार ने स्पष्ट किया था कि यह बदलाव केवल निर्यात किए जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू होंगे और घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल की मौजूदा एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

एटीएफ के साथ-साथ गैर-घरेलू उपयोग में आने वाले 5 किलोग्राम फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भी बढ़ोतरी की गई है। इसकी कीमत 762 रुपये से बढ़कर 764 रुपये प्रति सिलेंडर हो गई है। हालांकि यह बढ़ोतरी सीमित है, लेकिन व्यावसायिक उपयोग करने वाले छोटे कारोबारियों और संस्थानों पर इसका असर पड़ सकता है।

विमानन उद्योग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विस्तार कर रहा है और देश में हवाई यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में ईंधन की लागत बढ़ना एयरलाइंस के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। कंपनियां परिचालन खर्च को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न रणनीतियां अपनाती हैं, लेकिन लगातार बढ़ती ईंधन कीमतें उनके लिए वित्तीय दबाव बढ़ा सकती हैं।

यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में एटीएफ की कीमतों में और बदलाव संभव हैं। फिलहाल नई दरों के लागू होने के बाद एयरलाइंस कंपनियां अपने खर्च का आकलन कर रही हैं और यात्रियों की नजर इस बात पर बनी हुई है कि बढ़ती ईंधन लागत का असर हवाई टिकटों की कीमतों पर कितना पड़ता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed