शेयर बाजार में भारी बिकवाली से हाहाकार, सेंसेक्स और निफ्टी धड़ाम, जानें गिरावट के पीछे के 4 बड़े कारण

stock-indicator-14-8-26-2108

अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर गहराते अनिश्चितता के बादलों और वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी के संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत भारी बिकवाली के साथ हुई। शुरुआती कारोबार से ही बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिला, जिससे मुख्य सूचकांक बड़े नुकसान के साथ बंद हुए। वैश्विक संकेत बेहद चिंताजनक बने हुए हैं, जिसका सीधा असर निवेशकों की धारणा पर पड़ रहा है और बाजार में चौतरफा गिरावट का माहौल देखने को मिल रहा है।

सेंसेक्स और निफ्टी में दर्ज की गई बड़ी गिरावट

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों में तेज गिरावट आई, जिससे निवेशकों के अरबों रुपये डूब गए। बाजार के प्रमुख सूचकांक डेढ़ फीसदी से अधिक टूटकर बंद हुए। केवल बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप श्रेणियों में भी बिकवाली का गहरा असर देखा गया। चौतरफा बिकवाली के इस दौर में ऑटोमोटिव, पावर और फाइनेंशियल सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव का बढ़ता साया

बाजार में इस समय सबसे बड़ी अनिश्चितता का कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता क्षेत्रीय संघर्ष है। इस संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के बाधित होने का खतरा मंडराने लगा है। निवेशकों को डर है कि यदि यह तनाव लंबा खींचता है, तो इससे आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव फिर से बढ़ सकता है। यही वजह है कि जोखिम वाले संपत्तियों से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों में लगाने की होड़ मची हुई है।

कच्चे तेल के दामों में उबाल से बढ़ी भारत की चिंता

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी ने भारतीय बाजार के गणित को बिगाड़ दिया है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी क्रूड दोनों के दामों में उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है। तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ता है, जिससे चालू खाते का घाटा और मुद्रास्फीति बढ़ने का सीधा जोखिम पैदा हो जाता है।

वैश्विक बॉन्ड बाजार में यील्ड बढ़ने का प्रतिकूल प्रभाव

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में बॉन्ड यील्ड में हुई बढ़ोतरी ने भी घरेलू बाजारों पर अतिरिक्त दबाव डाला है। दुनिया के प्रमुख बाजारों में सरकारी प्रतिभूतियों पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ा है। जब विकसित देशों के बॉन्ड बाजारों में ब्याज दरें या यील्ड बढ़ती हैं, तो विदेशी निवेशक उभरते हुए बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित समझे जाने वाले बॉन्ड में लगाने लगते हैं, जिससे भारतीय शेयर बाजार को नुकसान उठाना पड़ता है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली

घरेलू शेयर बाजार पर दबाव का एक बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा की जा रही भारी बिकवाली भी है। पिछले कुछ महीनों में लिवाली करने के बाद विदेशी निवेशकों का रुख अचानक नकारात्मक हो गया है। चालू महीने के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से हजारों करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। चालू वर्ष में अब तक विदेशी निवेशकों द्वारा की गई कुल बिकवाली का आंकड़ा काफी चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है।

छोटे और मध्यम श्रेणी के शेयरों पर पड़ा बड़ा असर

बिकवाली का यह चक्र केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर व्यापक बाजार में स्पष्ट रूप से देखा गया। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में लार्जकैप की तुलना में भी अधिक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। रिटेल और छोटे निवेशकों की मौजूदगी आमतौर पर इन्हीं श्रेणियों में अधिक होती है, इसलिए इस बिकवाली से आम निवेशकों के पोर्टफोलियो पर गहरा असर पड़ा है।

बाजार का भावी दृष्टिकोण और निवेशकों के लिए स्थिति

मौजूदा हालात को देखते हुए बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को ऐसे समय में अत्यधिक सतर्कता बरतने और बिना सोचे-समझे बड़े फैसले लेने से बचने की सलाह दी जाती है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम ही बाजार की आगे की दिशा तय करेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed