शेयर बाजार में भारी बिकवाली से मचा हड़कंप, सेंसेक्स 1045 अंक टूटा और निवेशकों के डूबे खरबों रुपये

भारतीय शेयर बाजार के लिए सप्ताह का चौथा कारोबारी दिन बेहद निराशाजनक साबित हुआ। सप्ताह की शुरुआत से ही उतार-चढ़ाव देख रहे बाजार में अचानक तेज बिकवाली का दौर शुरू हुआ, जिसने देखते ही देखते बड़े गिरावट का रूप ले लिया। दिन का कारोबार खत्म होने तक प्रमुख सूचकांक बड़े नुकसान के साथ बंद हुए। इस अचानक आई गिरावट ने न केवल छोटे और खुदरा निवेशकों को चौंकाया, बल्कि संस्थागत निवेशकों के पोर्टफोलियो पर भी बड़ा असर डाला।
सुबह के सत्र से ही बाजार में सुस्ती का माहौल दिखाई दे रहा था, जो समय बीतने के साथ और अधिक गहराता चला गया। चौतरफा बिकवाली के चलते शेयर बाजार के लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकेतों और घरेलू आर्थिक कारकों के मिले-जुले असर के कारण यह तेज गिरावट देखने को मिली है।
चौतरफा बिकवाली से सहमे नजर आए सभी प्रमुख सेक्टर्स
कारोबारी सत्र के दौरान ऑटो, बैंकिंग, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और ऑयल एंड गैस सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव दर्ज किया गया। इसके अलावा रियल्टी और मेटल शेयरों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली। आमतौर पर जिन शेयरों को सुरक्षित दांव माना जाता था, वे भी इस गिरावट के तूफान से खुद को बचा नहीं सके। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी जोरदार गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह साफ जाहिर हुआ कि बाजार में डर का माहौल पूरी तरह हावी हो चुका है।
कंपनियों के शेयरों में आई इस एकतरफा गिरावट ने निवेशकों का भरोसा काफी हद तक डिगा दिया है। केवल कुछ ही चुनिंदा रक्षात्मक शेयर ऐसे रहे जो इस गिरावट के माहौल में भी मामूली बढ़त बनाने में सफल रहे। हालांकि, बाजार के समग्र रुख को बदलने में उनकी भूमिका बहुत सीमित रही और सूचकांक लगातार निचले स्तरों को छूते रहे।
निवेशकों को हुआ भारी वित्तीय नुकसान
बाजार में हुए इस भूचाल की वजह से शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण大幅 घट गया। महज कुछ ही घंटों के भीतर निवेशकों के अरबों रुपये डूब गए। इस बड़े नुकसान से ऐसे निवेशकों को सबसे बड़ा झटका लगा है जिन्होंने हाल ही में बाजार में नए पैसे लगाए थे। पोर्टफोलियो में भारी गिरावट देखकर कई निवेशकों ने घबराहट में अपने शेयर बेचने भी शुरू कर दिए, जिससे गिरावट का दायरा और बढ़ गया।
वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि इस तरह के बड़े उतार-चढ़ाव में जल्दबाजी में निर्णय लेना नुकसानदेह साबित हो सकता है। जब भी बाजार में इतनी बड़ी गिरावट आती है, तो बिना गहराई से सोचे-समझे किए गए फैसले निवेशकों की पूंजी को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए विशेषज्ञों ने मौजूदा स्थिति में धैर्य बनाए रखने की सलाह दी है।
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारणों का दिख रहा मिला-जुला असर
शेयर बाजार में आई इस गिरावट के पीछे कई प्रमुख वजहें मानी जा रही हैं। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे बदलाव और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली ने भी भारतीय बाजारों पर अतिरिक्त दबाव बनाने का काम किया है।
घमंडी महंगाई के आंकड़े और आर्थिक वृद्धि को लेकर जताई जा रही चिंताएं भी घरेलू बाजार के माहौल को प्रभावित कर रही हैं। आने वाली तिमाही के नतीजों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण भी बड़े निवेशक फिलहाल नया पूंजी लगाने से बच रहे हैं और सुरक्षात्मक रुख अपना रहे हैं।
आने वाले दिनों में कैसा रह सकता है बाजार का मिजाज
बाजार के जानकारों का कहना है कि आने वाले कुछ सत्रों में भी उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रह सकती है। जब तक वैश्विक स्तर पर स्थितियां सामान्य नहीं होतीं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली नहीं थमती, तब तक बाजार में तेजी की उम्मीद करना थोड़ा कठिन लग रहा है।
हालांकि, जो निवेशक लंबी अवधि के दृष्टिकोण से बाजार में बने हुए हैं, उनके लिए ऐसी गिरावट गुणवत्ता वाले मजबूत शेयरों को निचले स्तर पर हासिल करने का मौका भी प्रदान कर सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि बुनियादी रूप से मजबूत कंपनियों के शेयर इस गिरावट के दौर से बाहर निकलकर दोबारा तेजी पकड़ने की क्षमता रखते हैं।
