त्योहारी सीजन में ऑटो सेक्टर की बदली तस्वीर, दोपहिया वाहनों की मांग 16% बढ़ी, कारों की बिक्री में गिरावट

भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में त्योहारी सीजन के शुरुआती 14 दिनों के आंकड़ों से वाहनों की मांग की एक अलग तस्वीर सामने आई है। इस दौरान दोपहिया वाहनों और कमर्शियल वाहनों के रजिस्ट्रेशन में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में नरमी देखने को मिली। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, दोपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि पैसेंजर व्हीकल के रजिस्ट्रेशन में 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
त्योहारी सीजन को आमतौर पर वाहन कंपनियों के लिए बिक्री बढ़ाने का अहम अवसर माना जाता है। इस दौरान ग्राहक नई बाइक, स्कूटर, कार और अन्य वाहन खरीदने में दिलचस्पी दिखाते हैं। हालांकि, इस बार शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि सभी वाहन श्रेणियों में मांग एक जैसी नहीं रही। दोपहिया वाहनों की ओर ग्राहकों का रुझान मजबूत दिखाई दिया, जबकि कारों के बाजार में दूसरे सप्ताह के दौरान सुस्ती देखने को मिली।
दोपहिया वाहनों की मांग में लगातार मजबूती
त्योहारी सीजन के शुरुआती 14 दिनों में दोपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन में 16 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह प्रदर्शन बताता है कि बाइक और स्कूटर की मांग बाजार में मजबूत बनी हुई है। दोपहिया वाहन भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, क्योंकि इनका इस्तेमाल शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है।
दोपहिया वाहनों की मांग में बढ़ोतरी का असर वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के आंकड़ों में भी दिखाई दिया। अप्रैल से सितंबर के बीच इनके रजिस्ट्रेशन में सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में थोक बिक्री में भी 17 प्रतिशत का इजाफा हुआ।
रजिस्ट्रेशन और थोक बिक्री के आंकड़ों में अंतर होना सामान्य है। थोक बिक्री से कंपनियों की ओर से डीलरों को भेजे गए वाहनों का पता चलता है, जबकि रजिस्ट्रेशन से ग्राहकों के नाम पर पंजीकृत वाहनों की जानकारी मिलती है। दोनों आंकड़ों को मिलाकर देखने से बाजार की स्थिति को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।
पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में दूसरे सप्ताह कमजोर रही मांग
कारों और अन्य पैसेंजर व्हीकल के बाजार में त्योहारी सीजन के शुरुआती दिनों में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला था। पहले सात दिनों के दौरान इस श्रेणी के वाहनों के रजिस्ट्रेशन में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इससे उम्मीद बनी थी कि त्योहारी खरीदारी के दौरान कारों की मांग मजबूत रह सकती है।
हालांकि, दूसरे सप्ताह में रजिस्ट्रेशन की रफ्तार धीमी पड़ गई। शुरुआती 14 दिनों के कुल आंकड़ों में पैसेंजर व्हीकल रजिस्ट्रेशन में 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस बदलाव से संकेत मिलता है कि शुरुआती तेजी के बाद कार बाजार में मांग का प्रदर्शन कमजोर हुआ है।
फिर भी, पूरे वित्त वर्ष की पहली छमाही के आंकड़े इस सेगमेंट की मजबूत स्थिति दिखाते हैं। अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान पैसेंजर व्हीकल के रजिस्ट्रेशन और थोक बिक्री में सालाना आधार पर लगभग 28 से 29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।
इसलिए शुरुआती 14 दिनों के आंकड़ों को पूरे कार बाजार की कमजोरी का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। आने वाले सप्ताहों में मांग का प्रदर्शन, ग्राहकों की खरीदारी और कंपनियों की बिक्री से यह स्पष्ट होगा कि मौजूदा नरमी अस्थायी है या बाजार की रफ्तार पर इसका लंबा असर पड़ता है।
ट्रक रजिस्ट्रेशन में 76 प्रतिशत की बड़ी छलांग
त्योहारी सीजन के शुरुआती 14 दिनों में ट्रक सेगमेंट ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। इस दौरान ट्रक रजिस्ट्रेशन में सालाना आधार पर 76 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह वृद्धि अन्य वाहन श्रेणियों की तुलना में काफी अधिक रही।
हालांकि, इस आंकड़े को समझते समय पिछले साल के प्रदर्शन को ध्यान में रखना जरूरी है। पिछले वर्ष की समान अवधि में ट्रक रजिस्ट्रेशन में 26 प्रतिशत की गिरावट आई थी। ऐसे में इस बार की तेज बढ़ोतरी पर कमजोर आधार का भी प्रभाव पड़ा है।
अगर वर्ष 2024 के आंकड़ों से तुलना की जाए, तो त्योहारी अवधि के शुरुआती हिस्से में ट्रक रजिस्ट्रेशन की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट यानी सीएजीआर 14 प्रतिशत रही। इससे पता चलता है कि पिछले दो वर्षों के दौरान इस श्रेणी में कुल मिलाकर सकारात्मक वृद्धि का रुझान बना हुआ है।
ट्रक बाजार का प्रदर्शन माल ढुलाई, निर्माण गतिविधियों और व्यावसायिक परिवहन की जरूरतों से भी जुड़ा होता है। हालांकि, केवल रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों के आधार पर इन गतिविधियों में तेजी का निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
ट्रैक्टर रजिस्ट्रेशन में 21 प्रतिशत की वृद्धि
ट्रैक्टर सेगमेंट में भी त्योहारी सीजन के शुरुआती 14 दिनों के दौरान सकारात्मक रुझान देखने को मिला। इस अवधि में ट्रैक्टर रजिस्ट्रेशन में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
इससे पहले वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में ट्रैक्टर रजिस्ट्रेशन 18 प्रतिशत बढ़ा था। शुरुआती त्योहारी आंकड़ों में दर्ज वृद्धि इस सेगमेंट के लिए उत्साहजनक है। ट्रैक्टरों की मांग का संबंध कृषि गतिविधियों, किसानों की आय, फसलों की स्थिति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से रहता है।
हालांकि, आगे की मांग को लेकर कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं। पिछले साल का ऊंचा आधार और कमजोर मानसून ट्रैक्टर बाजार की वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं। यदि कृषि गतिविधियों और ग्रामीण मांग पर दबाव बढ़ता है, तो इसका असर किसानों के नए ट्रैक्टर खरीदने के फैसले पर पड़ सकता है।
इसलिए आने वाले महीनों में ट्रैक्टर रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों के साथ-साथ मानसून की स्थिति और ग्रामीण बाजार की परिस्थितियों पर भी नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए आगे की राह
त्योहारी सीजन के शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में मांग का रुझान वाहन श्रेणी के अनुसार अलग-अलग है। दोपहिया वाहनों में मजबूत वृद्धि देखने को मिली है, जबकि पैसेंजर व्हीकल के रजिस्ट्रेशन में शुरुआती तेजी के बाद गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, ट्रक और ट्रैक्टर के रजिस्ट्रेशन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
वाहन कंपनियों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि आने वाले दिनों में ग्राहकों की खरीदारी किस दिशा में जाती है। कार बाजार में मांग की वापसी, दोपहिया वाहनों की वृद्धि की निरंतरता और ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैक्टरों की खरीदारी ऑटो सेक्टर के आगे के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।
कुल मिलाकर, त्योहारी सीजन की शुरुआत ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए मिले-जुले संकेत लेकर आई है। कुछ श्रेणियों में मजबूत मांग दिखाई दे रही है, जबकि अन्य में सतर्कता की जरूरत है। आने वाले हफ्तों के रजिस्ट्रेशन और बिक्री के आंकड़े यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि त्योहारी खरीदारी का अंतिम असर भारतीय ऑटो बाजार पर कितना सकारात्मक रहता है।
