सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार रिकवरी, गोल्ड ₹1.42 लाख के पार; चांदी में भी उछाल

लगातार कई दिनों तक गिरावट झेलने के बाद सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। पिछले सप्ताह दोनों कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव बना हुआ था, लेकिन नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में निचले स्तरों पर खरीदारी लौटने से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भाव संभलते नजर आए। सोने का वायदा भाव एक बार फिर 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया, जबकि चांदी की कीमत भी 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब बनी रही।
हालांकि, बाजार में आई इस तेजी को फिलहाल तकनीकी रिकवरी के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीतिगत बैठक, महंगाई के आंकड़े और कच्चे तेल की कीमतें सोने-चांदी की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए बाजार की चाल पर नजर रखना जरूरी होगा।
एमसीएक्स पर सोने की कीमत में 761 रुपये की तेजी
घरेलू वायदा बाजार में सोमवार को सोने की कीमतों में सुधार दर्ज किया गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर दिसंबर एक्सपायरी वाला सोना करीब 0.50 प्रतिशत या 761 रुपये की बढ़त के साथ लगभग 1,42,733 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया।
दिन के कारोबार के दौरान सोने ने इससे भी ऊंचा स्तर छुआ। इसका पिछला बंद भाव 1,42,024 रुपये प्रति 10 ग्राम था। कारोबार के दौरान कीमत 864 रुपये यानी करीब 0.60 प्रतिशत उछलकर 1,42,888 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई।
इस तेजी से संकेत मिला कि पिछले सप्ताह की गिरावट के बाद कुछ निवेशक कम कीमतों पर खरीदारी करने के लिए बाजार में लौटे हैं। हालांकि, केवल एक कारोबारी सत्र की बढ़त से सोने में लंबे समय तक तेजी लौटने की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए आने वाले दिनों के भाव और वैश्विक संकेतों को देखना होगा।
चांदी का वायदा भाव 968 रुपये चढ़ा
सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई। एमसीएक्स पर दिसंबर वायदा चांदी करीब 0.49 प्रतिशत यानी 968 रुपये बढ़कर लगभग 1,96,687 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखाई दी।
कारोबारी सत्र के दौरान चांदी में खरीदारी का रुझान और मजबूत हुआ। इसका पिछला बंद भाव 1,95,719 रुपये प्रति किलोग्राम था। दिन में कीमत 1,467 रुपये यानी लगभग 0.74 प्रतिशत बढ़कर 1,97,186 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई।
चांदी में आई तेजी ऐसे समय में देखने को मिली, जब पिछले सप्ताह इसकी कीमतों में 7 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई थी। इतनी बड़ी गिरावट के बाद निचले स्तरों पर खरीदारी लौटना बाजार की सामान्य गतिविधियों में शामिल हो सकता है। फिर भी, चांदी की आगे की चाल वैश्विक मांग, औद्योगिक उपयोग और ब्याज दरों से जुड़े संकेतों पर निर्भर करेगी।
पिछले सप्ताह सोने और चांदी पर क्यों बना दबाव?
नए सप्ताह में रिकवरी से पहले दोनों कीमती धातुओं को भारी बिकवाली का सामना करना पड़ा था। पिछले सप्ताह सोने की कीमत लगभग 4 प्रतिशत टूट गई थी, जबकि चांदी में गिरावट 7 प्रतिशत से अधिक रही थी।
लगातार गिरावट के कारण बाजार में निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। जब कीमतें तेजी से नीचे आती हैं, तो कुछ कारोबारी मुनाफावसूली या जोखिम कम करने के लिए अपनी पोजिशन बेचते हैं। वहीं, कुछ निवेशक कीमतों में सुधार की उम्मीद के साथ निचले स्तरों पर खरीदारी करते हैं। सोमवार की तेजी में इस तरह की खरीदारी की भूमिका हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव का असर दिखाई दिया था। स्पॉट गोल्ड जुलाई के बाद पहली बार 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे फिसल गया था। इस गिरावट के बाद सोने और चांदी दोनों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया। अब बाजार यह समझने की कोशिश कर रहा है कि हालिया गिरावट के बाद कीमतों में स्थिरता आती है या बिकवाली फिर तेज होती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना-चांदी संभले
घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोमवार को दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में सुधार देखने को मिला। कॉमेक्स पर सोना सुबह के कारोबार में करीब 0.48 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,027 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसने 4,032.90 डॉलर प्रति औंस का उच्चतम स्तर भी छुआ।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी करीब 0.74 प्रतिशत बढ़कर 54.35 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखाई दी। कारोबारी सत्र के दौरान इसकी कीमत 54.47 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई, जो दिन के कारोबार का उच्चतम स्तर रहा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ता है। हालांकि, घरेलू कीमतों पर रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात लागत तथा स्थानीय बाजार की परिस्थितियों का भी प्रभाव रहता है। इसलिए विदेशी बाजार में तेजी आने पर भारत में कीमतों में बदलाव हमेशा उसी अनुपात में हो, यह जरूरी नहीं है।
अमेरिकी फेड की बैठक और महंगाई के आंकड़ों पर नजर
इस सप्ताह सोने और चांदी के निवेशकों के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली नीतिगत बैठक महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, अमेरिका के पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर यानी पीसीई महंगाई के आंकड़ों पर भी बाजार की नजर बनी हुई है।
पीसीई मुद्रास्फीति अमेरिकी केंद्रीय बैंक के लिए महंगाई की स्थिति का आकलन करने वाला एक अहम संकेतक है। यदि आंकड़े उम्मीद से अधिक आते हैं, तो ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने की संभावना मजबूत हो सकती है। ऐसी स्थिति में सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर दबाव पड़ सकता है, क्योंकि ये आम तौर पर नियमित ब्याज आय नहीं देतीं।
इसके विपरीत, महंगाई में नरमी के संकेत मिलने पर ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ सकती है। इससे सोने और चांदी को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक प्रतिक्रिया केंद्रीय बैंक के फैसले और उसके भविष्य के संकेतों पर भी निर्भर करेगी।
चांदी के लिए 2 लाख रुपये का स्तर अहम
घरेलू बाजार में चांदी की अगली चाल के लिहाज से 2 लाख से 2.02 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का दायरा महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर माना जा रहा है। यदि कीमत इस क्षेत्र को मजबूती से पार करती है, तो बाजार में आगे की तेजी को लेकर उम्मीद बढ़ सकती है। हालांकि, इसकी पुष्टि के लिए लगातार खरीदारी और कीमतों में टिकाव जरूरी होगा।
नीचे की ओर 1.92 लाख से 1.94 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का क्षेत्र महत्वपूर्ण समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। यदि चांदी की कीमतों में फिर गिरावट आती है, तो बाजार की नजर इस दायरे पर रह सकती है।
ये स्तर बाजार के तकनीकी आकलन पर आधारित हैं, न कि भविष्य की कीमतों की गारंटी। वास्तविक कारोबार में भाव तेजी से बदल सकते हैं।
कच्चे तेल की महंगाई भी बढ़ा सकती है चिंता
सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित करने वाला एक अन्य महत्वपूर्ण कारक कच्चे तेल का बाजार है। हाल के दिनों में ब्रेंट क्रूड की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थी। कच्चे तेल के महंगा होने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर महंगाई पर पड़ने की आशंका रहती है।
यदि महंगाई का दबाव बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती को टाल सकते हैं। ऐसा होने पर सोने और चांदी की तेजी सीमित हो सकती है। दूसरी ओर, वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को समर्थन भी मिल सकता है।
कुल मिलाकर, सोमवार को सोने और चांदी में आई तेजी ने पिछले सप्ताह की गिरावट के बाद बाजार को कुछ राहत दी है। लेकिन अमेरिकी फेड की बैठक, पीसीई महंगाई के आंकड़े और कच्चे तेल की कीमतें आगे के रुझान के लिए निर्णायक साबित हो सकती हैं। निवेशकों को केवल एक दिन की तेजी के आधार पर फैसला लेने के बजाय जोखिम, बाजार की अस्थिरता और अपनी निवेश अवधि को ध्यान में रखना चाहिए।
