Google और Apple पर दक्षिण कोरिया का बड़ा एक्शन, ऐप पेमेंट नियमों के उल्लंघन पर 6370 करोड़ वॉन का जुर्माना

दक्षिण कोरिया ने दुनिया की दो प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों गूगल और एप्पल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। देश के मीडिया और दूरसंचार नियामक ने दोनों कंपनियों पर ऐप स्टोर की भुगतान नीतियों के जरिए प्रतिस्पर्धा सीमित करने और ऐप डेवलपरों के विकल्पों को प्रभावित करने के आरोप में कुल 6,370 करोड़ वॉन का जुर्माना लगाने की मंजूरी दी है। यह रकम करीब 4.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर के बराबर बताई गई है।
इस फैसले के बाद एक बार फिर बड़ी टेक कंपनियों के ऐप स्टोर पर नियंत्रण, भुगतान व्यवस्था और बाजार में प्रतिस्पर्धा को लेकर बहस तेज हो सकती है। नियामक का कहना है कि गूगल और एप्पल ने अपने-अपने ऐप बाजारों में मजबूत स्थिति का इस्तेमाल करते हुए ऐसी नीतियां लागू कीं, जिनसे डेवलपरों के लिए वैकल्पिक भुगतान सेवाओं का उपयोग करना मुश्किल हो सकता था।
गूगल और एप्पल पर कितना जुर्माना लगा?
दक्षिण कोरिया के मीडिया एवं संचार आयोग ने दूरसंचार व्यवसाय अधिनियम के उल्लंघन से जुड़े मामले में गूगल पर 4,290 करोड़ वॉन और एप्पल पर 2,081 करोड़ वॉन का जुर्माना लगाने को मंजूरी दी है। दोनों कंपनियों पर लगाया गया कुल जुर्माना 6,371 करोड़ वॉन बैठता है, जिसे रिपोर्ट में लगभग 6,370 करोड़ वॉन बताया गया है।
नियामक के फैसले के तहत दोनों कंपनियों को सुधारात्मक आदेश भी जारी किए जाएंगे। इसका उद्देश्य संबंधित नीतियों में बदलाव कराना और ऐप बाजार में प्रतिस्पर्धा की स्थिति बेहतर करना है। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया कि इस मामले में कंपनियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज नहीं की जाएगी।
यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि गूगल और एप्पल के ऐप स्टोर स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए ऐप डाउनलोड करने और डिजिटल सेवाओं का भुगतान करने के प्रमुख माध्यम हैं। ऐसे में उनकी भुगतान नीतियों का असर ऐप बनाने वाली कंपनियों, सेवा प्रदाताओं और ग्राहकों पर पड़ सकता है।
ऐप डेवलपरों के भुगतान विकल्पों पर क्या है विवाद?
नियामक के अनुसार, गूगल और एप्पल ने अपने ऐप स्टोर में अपनी मजबूत बाजार स्थिति का इस्तेमाल किया। आरोप है कि दोनों कंपनियों ने ऐप डेवलपरों को अपनी निर्धारित भुगतान प्रणालियों का इस्तेमाल करने के लिए बाध्य किया और तीसरे पक्ष की भुगतान सेवाओं के लिए प्रतिकूल शर्तें लागू कीं।
ऐप डेवलपरों के लिए भुगतान प्रणाली एक अहम कारोबारी मुद्दा है। कई ऐप के जरिए उपयोगकर्ता डिजिटल सामग्री, सदस्यता या अन्य सेवाओं के लिए भुगतान करते हैं। यदि डेवलपरों को केवल सीमित भुगतान विकल्प मिलते हैं, तो इससे उनके खर्च, कारोबार के मॉडल और ग्राहकों को उपलब्ध विकल्पों पर असर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, ऐप स्टोर संचालित करने वाली कंपनियां अपनी भुगतान प्रणालियों को सुरक्षा, लेनदेन प्रबंधन और प्लेटफॉर्म के संचालन से जोड़ती हैं। ऐसे मामलों में नियामकों के सामने चुनौती यह तय करने की होती है कि प्लेटफॉर्म के नियम उचित हैं या उनका इस्तेमाल प्रतिस्पर्धा को सीमित करने के लिए किया जा रहा है।
दक्षिण कोरिया की ताजा कार्रवाई इसी विवाद के केंद्र में है। नियामक का निष्कर्ष है कि दोनों कंपनियों ने संबंधित कानूनों का उल्लंघन किया और अब उन्हें अपनी नीतियों में सुधार करना होगा।
अक्टूबर 2023 में शुरू हुई थी कार्रवाई की प्रक्रिया
गूगल और एप्पल के खिलाफ यह मामला अचानक सामने नहीं आया। दक्षिण कोरिया के नियामक ने अक्टूबर 2023 में ही दोनों कंपनियों को कथित उल्लंघनों के बारे में सूचित किया था। इसके बाद मामले की प्रक्रिया आगे बढ़ी और अब करीब तीन साल बाद जुर्माने तथा सुधारात्मक आदेशों को मंजूरी दी गई है।
इतनी लंबी प्रक्रिया यह दिखाती है कि बड़ी डिजिटल कंपनियों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा से जुड़े मामलों की जांच और नियामकीय कार्रवाई में समय लग सकता है। इसमें कंपनियों की नीतियों का मूल्यांकन, लागू कानूनों की व्याख्या और संबंधित तथ्यों की समीक्षा जैसे पहलू शामिल हो सकते हैं।
इस फैसले से ऐप स्टोर के कारोबार में नियमों के पालन और डेवलपरों के अधिकारों को लेकर दक्षिण कोरिया की नियामकीय भूमिका भी चर्चा में आ गई है। हालांकि, जुर्माने और सुधारात्मक आदेशों का व्यावहारिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां आगे अपनी नीतियों में क्या बदलाव करती हैं।
दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया के 449 यूट्यूब चैनलों पर कार्रवाई
गूगल से जुड़ी एक अन्य खबर में बताया गया है कि कंपनी ने 2026 की दूसरी तिमाही में दक्षिण कोरिया के 449 यूट्यूब चैनलों को बंद किया। ये चैनल मुख्य रूप से राजनीतिक विषयों से संबंधित सामग्री प्रकाशित करते थे। कार्रवाई अप्रैल, मई और जून के दौरान की गई।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में कोरियाई भाषा के 22 चैनल बंद किए गए। मई में सबसे अधिक 367 चैनलों पर कार्रवाई हुई, जबकि जून में 60 चैनल बंद किए गए। इस तरह तीन महीनों के दौरान कुल 449 चैनल हटाए गए।
मई में की गई कार्रवाई विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, क्योंकि उस समय 3 जून को होने वाले स्थानीय चुनाव नजदीक थे। हालांकि, केवल समय के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कार्रवाई का उद्देश्य चुनाव को प्रभावित करना था। इसके लिए संबंधित चैनलों की गतिविधियों और कंपनी की ओर से बताए गए कारणों को समझना जरूरी है।
राजनीतिक सामग्री के कारण क्यों बंद हुए चैनल?
गूगल की रिपोर्ट के मुताबिक, इन चैनलों पर दक्षिण कोरियाई सरकार के समर्थन या आलोचना में सामग्री प्रकाशित की जा रही थी। इसके अलावा, कुछ चैनल राजनीतिक दलों और नेताओं के पक्ष या विरोध में वीडियो साझा कर रहे थे।
राजनीतिक विषयों पर विचार रखना और सरकार या नेताओं की आलोचना करना अपने आप में किसी चैनल को बंद किए जाने का पर्याप्त कारण नहीं माना जा सकता। इसलिए इन मामलों में कार्रवाई के पीछे कंपनी की ओर से बताए गए विशिष्ट नियमों और चैनलों की गतिविधियों के बीच अंतर समझना महत्वपूर्ण है।
रिपोर्ट में इन चैनलों को लेकर की गई कार्रवाई का विवरण दिया गया है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर सभी चैनलों की सामग्री या प्रत्येक मामले में लागू किए गए नियमों के बारे में अलग-अलग निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
चीन और रूस से जुड़े चैनलों पर भी हुई थी कार्रवाई
रिपोर्ट में दक्षिण कोरिया के चैनलों पर कार्रवाई की तुलना पिछली तिमाहियों के आंकड़ों से भी की गई है। बताया गया कि 2025 की दूसरी तिमाही से 2026 की पहली तिमाही के बीच गूगल ने दक्षिण कोरिया का कोई यूट्यूब चैनल बंद नहीं किया था।
इसी अवधि में चीन से जुड़े 9,173 और रूस से जुड़े 2,083 चैनलों को बंद किया गया था। ये आंकड़े अलग-अलग देशों से जुड़े चैनलों पर की गई कार्रवाई के पैमाने को दर्शाते हैं। हालांकि, इनकी तुलना करते समय चैनलों की संख्या के साथ कार्रवाई के कारणों और संबंधित गतिविधियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
टेक कंपनियों की नीतियों पर बढ़ेगी निगरानी?
दक्षिण कोरिया में गूगल और एप्पल पर लगाया गया जुर्माना डिजिटल बाजार में प्रतिस्पर्धा और बड़ी टेक कंपनियों की जवाबदेही से जुड़ा अहम मामला है। ऐप स्टोर के नियम सीधे डेवलपरों के कारोबार और उपयोगकर्ताओं के भुगतान अनुभव को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में नियामक यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि प्लेटफॉर्म अपनी मजबूत स्थिति का अनुचित लाभ न उठाएं।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि दोनों कंपनियां सुधारात्मक आदेशों के तहत क्या कदम उठाती हैं और उनकी भुगतान नीतियों में किस तरह के बदलाव होते हैं। साथ ही, यूट्यूब चैनलों पर की गई कार्रवाई ने ऑनलाइन राजनीतिक सामग्री और प्लेटफॉर्म के नियमों को लेकर भी चर्चा बढ़ाई है।
कुल मिलाकर, ये घटनाक्रम दिखाते हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्मों को केवल तकनीकी सेवाएं देने वाली कंपनियों के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे बाजार संचालकों के रूप में भी देखा जा रहा है जिनकी नीतियों का असर कारोबार, प्रतिस्पर्धा और सार्वजनिक चर्चा पर पड़ता है।
