आंध्र प्रदेश निकाय चुनाव एन. बालकृष्ण ने पत्नी के साथ डाला ज्यादा से ज्यादा मतदाता करेंगे उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला

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आंध्र प्रदेश में रविवार को शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज रहीं। राज्य के अलग-अलग जिलों में सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की आवाजाही देखने को मिली। इस चुनाव में आम लोगों के साथ-साथ कई बड़े राजनीतिक चेहरे भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने पहुंचे। तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के विधायक और मशहूर तेलुगु फिल्म अभिनेता एन. बालकृष्ण ने भी अपनी पत्नी वसुंधरा के साथ मतदान किया। उनके अलावा राज्य सरकार के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी अलग-अलग मतदान केंद्रों पर पहुंचकर वोट डाला।

बालकृष्ण ने पत्नी वसुंधरा के साथ किया मतदान

टॉलीवुड अभिनेता और हिंदूपुर से टीडीपी विधायक एन. बालकृष्ण ने श्री सत्य साईं जिले के हिंदूपुर स्थित एक मतदान केंद्र पर अपनी पत्नी वसुंधरा के साथ वोट डाला। मतदान के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए लोकतंत्र में मताधिकार की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मतदान केवल एक संवैधानिक अधिकार नहीं है, बल्कि यह देश और समाज के भविष्य को बेहतर बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।

बालकृष्ण ने राज्य के सभी मतदाताओं से अपील की कि वे मतदान के दिन घरों से बाहर निकलें और अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट दें। उनका कहना था कि जनता के वोट से ही ऐसे जनप्रतिनिधियों का चयन होता है, जो क्षेत्र के विकास और लोगों के कल्याण के लिए काम कर सकते हैं।

मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने भी डाले वोट

आंध्र प्रदेश के कई मंत्रियों ने भी रविवार को मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लिया। नागरिक आपूर्ति मंत्री और जन सेना पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल नादेंदला मनोहर ने गुंटूर जिले के तेनाली में अपना वोट डाला। वहीं मंत्री अनम रामनारायण रेड्डी ने श्री पोट्टी श्रीरामुलु नेल्लोर जिले के आत्माकुर में मतदान किया।

महिला एवं बाल कल्याण तथा आदिवासी कल्याण मंत्री गुम्मादी संध्या रानी ने पार्वतीपुरम मान्यम जिले के सलुरु में अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इन नेताओं की मतदान में भागीदारी ने चुनाव के प्रति राजनीतिक दलों की सक्रियता को भी दर्शाया।

विजयवाड़ा में मेयर पद के उम्मीदवारों ने किया मतदान

विजयवाड़ा में भी चुनावी गतिविधियां काफी तेज रहीं। यहां जन सेना पार्टी की मेयर उम्मीदवार वंगावीती राधा ने मतदान केंद्र पहुंचकर अपना वोट डाला। उनके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार और पूर्व आईपीएस अधिकारी एबी वेंकटेश्वर राव ने भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।

राज्य के विभिन्न हिस्सों में तेलुगु देशम पार्टी, जन सेना पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के साथ विपक्षी वाईएसआरसीपी के नेताओं ने भी मतदान किया। टीडीपी के प्रदेश अध्यक्ष पल्ला श्रीनिवास राव ने विशाखापत्तनम में वोट डाला। चुनाव में प्रमुख राजनीतिक दलों की भागीदारी के कारण कई शहरी निकायों में मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है।

92 शहरी निकायों में चुनाव, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

आंध्र प्रदेश में कुल 92 शहरी स्थानीय निकायों के लिए चुनाव कराए जा रहे हैं। इनमें 13 नगर निगम और 87 में से 79 नगरपालिकाएं एवं नगर पंचायतें शामिल हैं। मतदान को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है।

राज्यभर में कुल 11,378 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। यहां रविवार सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हुआ, जो शाम 5 बजे तक निर्धारित था। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा बलों और चुनाव कर्मचारियों की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

इस चुनाव का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं, सड़क, पेयजल, सफाई, स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय विकास से जुड़े फैसलों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की अहम भूमिका होती है।

99.35 लाख मतदाता करेंगे उम्मीदवारों के भविष्य का फैसला

इस बार आंध्र प्रदेश के शहरी निकाय चुनाव में कुल 99.35 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के पात्र हैं। मेयर, चेयरपर्सन और वार्ड स्तर के पदों के लिए कुल 10,262 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।

इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं और उम्मीदवारों की मौजूदगी से राज्य के शहरी निकाय चुनावों का राजनीतिक महत्व बढ़ गया है। अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दे, विकास कार्य और राजनीतिक दलों की पकड़ उम्मीदवारों की जीत-हार में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

कई सीटों पर निर्विरोध चुने गए प्रतिनिधि

इस चुनाव में कुछ नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों में उम्मीदवारों को निर्विरोध जीत भी मिली है। कुल 17 नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों में चेयरपर्सन पद के उम्मीदवार बिना मुकाबले चुने गए। इसके अलावा आठ नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों में चेयरपर्सन के साथ वार्ड सदस्य भी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।

निर्विरोध चुनाव की वजह से इन सीटों पर मतदान की जरूरत नहीं पड़ी। हालांकि, राज्य के दूसरे शहरी निकायों में चुनावी मुकाबला जारी रहा और मतदाताओं ने विभिन्न उम्मीदवारों के पक्ष में अपना फैसला सुनाया।

मेयर और चेयरपर्सन पदों पर कड़ा मुकाबला

राज्य के 13 नगर निगमों में मेयर पद के लिए कुल 153 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं 70 नगरपालिकाओं में चेयरपर्सन पद के लिए 367 उम्मीदवार मैदान में हैं। इन पदों पर जीत हासिल करना राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नगर निगम और नगरपालिका शहरी प्रशासन की प्रमुख संस्थाएं हैं।

मेयर और चेयरपर्सन के पदों पर कब्जा मिलने से राजनीतिक दलों को स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर मिलता है।

हजारों वार्डों में भी उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर

नगरपालिका और नगर पंचायतों के वार्ड स्तर पर भी चुनावी मुकाबला काफी व्यापक है। कुल 922 पार्षद वार्डों में से 804 वार्डों के लिए मतदान कराया जा रहा है, जबकि बाकी 118 वार्डों में उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा चुके हैं।

राज्य के 804 नगरपालिका वार्डों में कुल 3,077 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अतिरिक्त नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों के 2,382 वार्डों के लिए कुल 6,669 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

खास बात यह है कि जिन वार्डों में पार्षद उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं, वहां भी मेयर पद के लिए मतदान जारी है। इसलिए निर्विरोध वार्डों वाले क्षेत्रों में भी मतदाताओं के लिए वोट डालना महत्वपूर्ण बना हुआ है।

शहरी विकास के लिए अहम माने जा रहे चुनाव

आंध्र प्रदेश के ये निकाय चुनाव केवल राजनीतिक दलों की प्रतिष्ठा से जुड़े नहीं हैं, बल्कि आने वाले समय में शहरों के विकास की दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभाएंगे। स्थानीय स्तर पर पानी, सड़क, सफाई, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट और अन्य नागरिक सुविधाएं मतदाताओं के लिए प्रमुख मुद्दे हैं।

अब इन चुनावों में मतदाताओं का फैसला यह तय करेगा कि आने वाले कार्यकाल में शहरी निकायों की कमान किन प्रतिनिधियों के हाथों में होगी। बालकृष्ण समेत कई बड़े नेताओं के मतदान में शामिल होने से चुनावी गतिविधियों को भी खास चर्चा मिली है।

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