तमिलनाडु में 1.50 लाख करोड़ रुपये की शहरी विकास योजना, सड़क-पानी और सीवेज पर होगा सबसे बड़ा निवेश

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तमिलनाडु सरकार ने राज्य के शहरों की तस्वीर बदलने के लिए एक बड़ी शहरी विकास योजना को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने पांच साल के विशेष शहरी विकास कार्यक्रम को लेकर सरकारी आदेश जारी कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर करीब 1.50 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी शहरी स्थानीय निकायों में आधुनिक और विश्वस्तरीय बुनियादी सुविधाएं विकसित करना है।

इस योजना के तहत शहरों में सड़कों की स्थिति सुधारने, बेहतर परिवहन व्यवस्था तैयार करने, सीवेज नेटवर्क का विस्तार करने और प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण, जलाशयों के पुनर्जीवन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और आधुनिक निगरानी व्यवस्था को भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। सरकार का मानना है कि एकीकृत तरीके से किए जाने वाले इन कार्यों से शहरों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।

पांच साल में बदलेंगी तमिलनाडु के शहरों की तस्वीर

तमिलनाडु सरकार ने इस पांच वर्षीय कार्यक्रम को प्रधानमंत्री एकीकृत शहरी विकास योजना के नाम से बजट में घोषित किया था। अब इसे जमीन पर उतारने के लिए सरकारी आदेश जारी किया गया है। योजना का दायरा राज्य के सभी शहरी स्थानीय निकायों तक रखा गया है।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत केवल निर्माण कार्यों पर ही ध्यान नहीं दिया जाएगा, बल्कि शहरों की मौजूदा सुविधाओं को भी मजबूत किया जाएगा। सड़क, पानी, सीवेज, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं का समाधान एक साझा विकास ढांचे के तहत करने की तैयारी है।

सरकार की योजना है कि आने वाले पांच वर्षों में शहरी क्षेत्रों को अधिक व्यवस्थित, स्वच्छ और सुविधाजनक बनाया जाए, ताकि बढ़ती आबादी के साथ शहरों पर पड़ने वाले दबाव को भी कम किया जा सके।

सड़कों और परिवहन पर खर्च होंगे 60 हजार करोड़ रुपये

इस महत्वाकांक्षी योजना में सबसे बड़ा बजट शहरी सड़कों और परिवहन व्यवस्था के लिए रखा गया है। इसके लिए 60,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह कुल योजना का सबसे बड़ा हिस्सा है।

इस राशि से शहरी सड़कों का विकास, मौजूदा मार्गों का सुधार और परिवहन से संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूत करने जैसे कार्य किए जाएंगे। बेहतर सड़क नेटवर्क तैयार होने से शहरों में आवागमन आसान बनाने और यातायात संबंधी परेशानियों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण तमिलनाडु के कई शहरों में यातायात और सड़क सुविधाओं पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में यह निवेश शहरी परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सीवेज नेटवर्क के लिए 50 हजार करोड़ का बजट

शहरों में गंदे पानी की निकासी और सीवेज प्रबंधन की समस्या दूर करने के लिए सरकार ने 50,000 करोड़ रुपये का बड़ा आवंटन किया है। इस राशि का इस्तेमाल सीवेज से जुड़े बुनियादी ढांचे को विकसित करने और भूमिगत सीवरेज नेटवर्क का विस्तार करने में किया जाएगा।

योजना का एक प्रमुख लक्ष्य शहरी क्षेत्रों में भूमिगत सीवरेज नेटवर्क का पूर्ण कवरेज सुनिश्चित करना है। इससे खुले नालों और गंदे पानी के अनुचित निपटान की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।

बेहतर सीवेज व्यवस्था से न केवल शहरों की साफ-सफाई में सुधार होगा, बल्कि जल प्रदूषण और दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियों के खतरे को कम करने में भी सहायता मिलेगी।

पेयजल परियोजनाओं पर 30,350 करोड़ रुपये खर्च

हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना इस योजना के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। इसके लिए सरकार ने 30,350 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इस राशि से पानी की आपूर्ति से संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा और नए कनेक्शन उपलब्ध कराने पर काम होगा।

योजना में नगर निगम क्षेत्रों के लिए 24 घंटे पानी की आपूर्ति की परिकल्पना की गई है। वहीं नगरपालिकाओं में प्रतिदिन तीन घंटे पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए जलापूर्ति नेटवर्क, पाइपलाइन और अन्य जरूरी सुविधाओं को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शहरी परिवारों को पानी के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर

शहरों को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए ठोस कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में 3,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके माध्यम से शहरी क्षेत्रों में कचरे के संग्रह, प्रबंधन और निपटान से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने की योजना है।

इसके अलावा जलाशयों के पुनर्जीवन और सामाजिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 2,000-2,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। हरित क्षेत्र के विकास और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी पहलों के लिए 1,500-1,500 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

इन निवेशों का उद्देश्य शहरों में बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं विकसित करने के साथ-साथ नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार करना है।

पांच करोड़ पौधे लगाने और नदियों को पुनर्जीवित करने की योजना

तमिलनाडु सरकार ने इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण को भी प्रमुख स्थान दिया है। इसके तहत राज्य में पांच करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा अड्यार और कूवम नदियों के साथ-साथ विभिन्न जलाशयों के पुनर्जीवन की योजना भी बनाई गई है। इन जल स्रोतों को बहाल करने से जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और शहरी पर्यावरण में सुधार हो सकेगा।

शहरों में बढ़ते प्रदूषण और घटते हरित क्षेत्रों को देखते हुए पौधारोपण तथा जलाशयों की बहाली को महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

एआई सीसीटीवी कैमरों से होगी आधुनिक निगरानी

योजना में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत शहरों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रस्ताव है। इन कैमरों के माध्यम से शहरी क्षेत्रों की निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की जाएगी।

इसके अलावा आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए पशु नसबंदी केंद्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव है। इससे शहरी क्षेत्रों में पशुओं की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने और नागरिकों को होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है।

टीयूएफआईडीसीओ संभालेगा योजना का वित्तीय प्रबंधन

इस पूरे कार्यक्रम को लागू करने और वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी तमिलनाडु शहरी वित्त एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (टीयूएफआईडीसीओ) को सौंपी गई है। सरकारी आदेश के अनुसार, यह संस्था योजना की कार्यान्वयन और वित्तीय प्रबंधन एजेंसी के रूप में काम करेगी।

कुल मिलाकर 1.50 लाख करोड़ रुपये का यह पांच वर्षीय कार्यक्रम तमिलनाडु के शहरी विकास के लिए एक बड़ी पहल है। यदि निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार परियोजनाएं पूरी होती हैं, तो राज्य के शहरों में सड़क, पेयजल, सीवेज, स्वच्छता और पर्यावरण से जुड़ी सुविधाओं में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है। आने वाले पांच वर्षों में इस योजना का वास्तविक असर इसके प्रभावी क्रियान्वयन और परियोजनाओं की समय पर पूर्ति पर निर्भर करेगा।

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