अजीत डोभाल का वियतनाम दौरा: रक्षा मंत्री से मुलाकात, भारत-वियतनाम के बीच रणनीतिक सहयोग को मिलेगी नई मजबूती

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भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की वियतनाम यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक और रक्षा संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सोमवार को वियतनाम की राजधानी हनोई में अजीत डोभाल ने वहां के उप प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान गियांग से मुलाकात की। इस बैठक में भारत और वियतनाम के बीच जारी रक्षा सहयोग की समीक्षा की गई। साथ ही दोनों देशों ने आपसी संबंधों को और मजबूत बनाने तथा सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग का दायरा बढ़ाने पर सहमति जताई।

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा, समुद्री गतिविधियों और सामरिक संतुलन को लेकर कई तरह की चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे में भारत और वियतनाम के बीच बढ़ती नजदीकी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है।

हनोई में हुई अहम रक्षा और सुरक्षा वार्ता

अजीत डोभाल रविवार को आधिकारिक यात्रा पर वियतनाम की राजधानी हनोई पहुंचे थे। सोमवार को उन्होंने वियतनाम के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री जनरल फान वान गियांग के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में अब तक हुई प्रगति का आकलन करना और भविष्य में सहयोग की नई संभावनाओं पर विचार करना था।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने मौजूदा रक्षा साझेदारी को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। भारत और वियतनाम के बीच सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा उपकरणों, तकनीकी सहयोग और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में पहले से ही साझेदारी मौजूद है। दोनों देश चाहते हैं कि इस सहयोग को आने वाले वर्षों में और व्यापक बनाया जाए।

इस मुलाकात से यह संकेत मिलता है कि भारत और वियतनाम केवल पारंपरिक कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में भी एक-दूसरे के महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में आगे बढ़ना चाहते हैं।

भारत-वियतनाम संबंधों को मिला रणनीतिक साझेदारी का नया दर्जा

भारत और वियतनाम के रिश्तों में पिछले कुछ समय के दौरान महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। मई 2026 में वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘विस्तृत व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक पहुंचाने का फैसला किया था।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति तो लाम के बीच हुई बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई थी। दोनों नेताओं ने रक्षा, व्यापार, आर्थिक विकास, तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया था।

दोनों देशों का मानना है कि मजबूत साझेदारी से न केवल उनकी रणनीतिक स्थिति बेहतर होगी, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे। भारत के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य और वियतनाम के विजन 2045 को ध्यान में रखते हुए दोनों देश आर्थिक तथा तकनीकी सहयोग को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं।

2030 तक रक्षा सहयोग बढ़ाने की तैयारी

भारत और वियतनाम के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए 2030 तक का संयुक्त विजन स्टेटमेंट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस दस्तावेज का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना और नई संभावनाओं को विकसित करना है।

रक्षा साझेदारी के तहत सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग, तकनीकी आदान-प्रदान और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। भारत वियतनाम की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और उसके साथ दीर्घकालिक रणनीतिक संबंध विकसित करने में रुचि रखता है।

वहीं वियतनाम भी भारत को एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय साझेदार के रूप में देखता है। दोनों देशों के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और शांति बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

आतंकवाद और साइबर सुरक्षा पर भी बढ़ रहा सहयोग

रक्षा सहयोग के साथ-साथ भारत और वियतनाम आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी लगातार बातचीत कर रहे हैं। पिछले महीने नई दिल्ली में दोनों देशों के बीच सुरक्षा संवाद का चौथा संस्करण आयोजित किया गया था।

इस बैठक में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई, साइबर सुरक्षा, समुद्री सहयोग, आर्थिक सुरक्षा और उभरती तकनीकों से संबंधित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। दोनों देशों ने सुरक्षा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में अपने अनुभव साझा किए और आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया।

इस संवाद की सह-अध्यक्षता भारत के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पवन कपूर और वियतनाम के सार्वजनिक सुरक्षा उप मंत्री सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल फाम थे तुंग ने की थी।

आज के दौर में साइबर हमले, डिजिटल अपराध और आतंकवाद जैसी चुनौतियां किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। इसलिए भारत और वियतनाम के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

2016 के समझौते से आगे बढ़ रही सुरक्षा साझेदारी

भारत और वियतनाम के बीच सुरक्षा संवाद की व्यवस्था वर्ष 2016 में हुए सहयोग समझौते के तहत संचालित होती है। इस व्यवस्था के अंतर्गत दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और वियतनाम के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय के बीच नियमित बातचीत होती है।

यह संवाद सामान्यतः प्रत्येक दो वर्ष में आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों की पहचान करना, आपसी समझ बढ़ाना और सहयोग के नए रास्ते तैयार करना है।

चौथे सुरक्षा संवाद में भी दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियों पर अपने विचार साझा किए। इससे स्पष्ट है कि दोनों देश बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात में एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखना चाहते हैं।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत-वियतनाम की बढ़ती अहमियत

भारत और वियतनाम के संबंधों का महत्व केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिहाज से भी यह साझेदारी महत्वपूर्ण है।

भारत की एक्ट ईस्ट नीति में वियतनाम एक अहम भागीदार है। दोनों देश स्वतंत्र, खुले और नियम आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अवधारणा का समर्थन करते हैं। समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के मुद्दों पर उनकी सोच भी काफी हद तक एक जैसी है।

अजीत डोभाल की यह यात्रा इसी व्यापक रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने का हिस्सा है। रक्षा मंत्री के साथ उनकी मुलाकात और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर बातचीत से दोनों देशों के बीच भरोसा और समन्वय बढ़ने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, भारत और वियतनाम अपनी साझेदारी को रक्षा, सुरक्षा, तकनीक और कूटनीति के नए आयामों तक ले जाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अजीत डोभाल का हनोई दौरा इस रिश्ते को नई मजबूती देने और भविष्य के सहयोग की रूपरेखा तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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