शेयर बाजार में दिवाली की आतिशबाजी जारी, सेंसेक्स 383 अंक उछला और निफ्टी 23,960 के पार; मिडकैप-स्मॉलकैप में जोरदार तेजी

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भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में भी जारी रहा। बुधवार को घरेलू बाजार ने मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और घरेलू अर्थव्यवस्था को लेकर बेहतर उम्मीदों ने निवेशकों का उत्साह बढ़ाया। खास बात यह रही कि इस बार तेजी केवल बड़ी कंपनियों के शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी जमकर खरीदारी देखने को मिली। बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ बंद हुए।

सेंसेक्स और निफ्टी ने दर्ज की मजबूत बढ़त

बुधवार के कारोबारी सत्र के अंत में बीएसई सेंसेक्स 383.55 अंक यानी 0.50 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,301.40 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह एनएसई निफ्टी 149.75 अंक यानी 0.63 प्रतिशत मजबूत होकर 23,960.60 पर पहुंच गया।

लगातार पांच सत्रों से जारी तेजी ने बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया है। निवेशकों की खरीदारी से प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला और कारोबार के दौरान बाजार में मजबूती बनी रही। निफ्टी का 24 हजार के करीब पहुंचना भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा उत्साह

बुधवार के कारोबार की सबसे खास बात व्यापक स्तर पर हुई खरीदारी रही। बड़ी कंपनियों के साथ मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई। इसका असर मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों पर साफ नजर आया।

निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 909.25 अंक यानी 1.55 प्रतिशत की तेजी के साथ 59,505.50 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 373.55 अंक यानी 2 प्रतिशत का उछाल आया और यह 19,026.40 के स्तर पर पहुंच गया।

दोनों सूचकांकों में सेंसेक्स और निफ्टी के मुकाबले ज्यादा तेजी दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों का भरोसा केवल चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे बाजार के दूसरे हिस्सों में भी अवसर तलाश रहे हैं। हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेजी के साथ जोखिम भी अधिक हो सकता है।

मीडिया, रियल्टी और मेटल सेक्टर में जोरदार खरीदारी

सेक्टर के लिहाज से बुधवार का दिन कई उद्योगों के लिए शानदार रहा। निफ्टी मीडिया इंडेक्स 5.15 प्रतिशत की तेजी के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सूचकांक रहा। इसके बाद निफ्टी रियल्टी में 2.85 प्रतिशत और निफ्टी मेटल में 2.80 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

इसके अलावा निफ्टी इंडिया डिफेंस 2.49 प्रतिशत, निफ्टी एनर्जी 2.17 प्रतिशत और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 2.04 प्रतिशत मजबूत हुए। निफ्टी कमोडिटीज में 1.65 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस में 1.54 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली।

बाजार में ज्यादातर सेक्टरों का हरे निशान में रहना इस बात का संकेत रहा कि खरीदारी का दायरा व्यापक था। हालांकि, आईटी सेक्टर इस तेजी से अलग रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.50 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ और बुधवार को प्रमुख सेक्टरों में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला सूचकांक रहा।

सेंसेक्स के इन शेयरों ने बाजार को दिया सहारा

सेंसेक्स में शामिल कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। बीईएल, टाइटन, इंडिगो, बजाज फाइनेंस, आईटीसी, अदाणी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व और टाटा स्टील प्रमुख रूप से बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों में शामिल रहे।

इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, भारतीय स्टेट बैंक, मारुति सुजुकी, पावर ग्रिड, ट्रेंट और रिलायंस इंडस्ट्रीज में भी मजबूती रही। एनटीपीसी, सन फार्मा, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और भारती एयरटेल के शेयर भी बढ़त के साथ बंद हुए।

दूसरी ओर आईटी कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। टीसीएस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, इन्फोसिस और टेक महिंद्रा गिरावट के साथ बंद हुए। इनके अलावा इटरनल, कोटक महिंद्रा बैंक, एशियन पेंट्स, एलएंडटी और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयरों में भी कमजोरी दर्ज की गई।

कच्चे तेल की गिरती कीमतों से बाजार को राहत

शेयर बाजार की तेजी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को भी एक महत्वपूर्ण वजह माना जा रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने से देश के आयात बिल और महंगाई के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

तेल की कीमतों में नरमी से परिवहन, विमानन और तेल पर निर्भर कई उद्योगों की लागत को राहत मिलने की संभावना रहती है। इससे कंपनियों के मुनाफे और आर्थिक गतिविधियों को भी समर्थन मिल सकता है। इसी वजह से कच्चे तेल में गिरावट को भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

वैश्विक घटनाक्रम से निवेशकों की उम्मीदें बढ़ीं

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कुछ घटनाक्रमों ने निवेशकों की धारणा को मजबूत किया है। अमेरिका के मध्यावधि चुनावों के नतीजों के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बनने की उम्मीद जताई जा रही है। निवेशकों को आशा है कि व्यापार और टैरिफ नीतियों को लेकर अधिक संतुलित रुख देखने को मिल सकता है।

यदि वैश्विक व्यापार संबंधी अनिश्चितताएं कम होती हैं, तो उभरते बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की दिलचस्पी बढ़ सकती है। भारत जैसे बाजारों को इससे फायदा मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, विदेशी निवेश का वास्तविक रुख वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगा।

बजट की उम्मीद और त्योहारी मांग से बाजार को समर्थन

घरेलू मोर्चे पर भी बाजार को कई सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। आगामी केंद्रीय बजट में करदाताओं को राहत मिलने की उम्मीद निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रही है। इसके साथ ही कंपनियों के उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजे और त्योहारी सीजन में मजबूत खपत ने भी बाजार को सहारा दिया है।

त्योहारी खरीदारी बढ़ने से वाहन, उपभोक्ता सामान, रिटेल और अन्य क्षेत्रों की कंपनियों को लाभ मिलने की उम्मीद रहती है। यदि घरेलू मांग मजबूत बनी रहती है, तो कंपनियों की बिक्री और कमाई पर इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है।

आगे कैसा रह सकता है शेयर बाजार का रुख?

लगातार पांच कारोबारी सत्रों की तेजी ने निवेशकों के बीच उम्मीद बढ़ाई है। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, घरेलू मांग, बेहतर कॉर्पोरेट नतीजे और वैश्विक माहौल में सुधार बाजार के लिए सकारात्मक कारक बने हुए हैं।

इसके बावजूद निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि शेयर बाजार में तेजी हमेशा एक जैसी नहीं रहती। वैश्विक आर्थिक आंकड़े, ब्याज दरों से जुड़े फैसले, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन में बदलाव बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।

फिलहाल बुधवार का कारोबार यह दिखाता है कि बाजार में खरीदारी का उत्साह व्यापक है और मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है। आने वाले सत्रों में यह तेजी कितनी टिकाऊ रहती है, इस पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

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