बिहार में भूमि मापी की नई व्यवस्था लागू, अब 7 से 11 दिन में निपटेंगे जमीन से जुड़े विवाद

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बिहार में जमीन से जुड़े मापी विवादों को लेकर अब लोगों को लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार ने भूमि मापी की प्रक्रिया को पूरी तरह समयबद्ध और ऑनलाइन बनाते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है। इस फैसले से जमीन विवादों में कमी आने की उम्मीद है और आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से भी राहत मिलेगी।

डिप्टी सीएम सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय सिन्हा के इस अहम फैसले को जमीन से जुड़े मामलों में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से मापी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और लोगों को महीनों तक भटकना नहीं पड़ेगा। अब तय समय के भीतर मापी पूरी कर रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध करा दी जाएगी।

नई व्यवस्था के तहत अविवादित जमीन की मापी सिर्फ सात दिनों में पूरी कर ली जाएगी। वहीं, विवादित मामलों में भी अधिकतम 11 दिनों के भीतर मापी की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन किया जाएगा और मापी की रिपोर्ट 14 दिनों के अंदर पोर्टल पर अपलोड कर दी जाएगी। पहले इस पूरी प्रक्रिया में करीब 30 दिन या उससे भी ज्यादा समय लग जाता था।

यह फैसला बिहार सरकार की सात निश्चय-3 योजना के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य आम लोगों की जीवन-शैली को आसान बनाना और जमीन से जुड़े कामों में समय व परेशानी दोनों को कम करना है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा मिलेगा और जमीन संबंधी विवाद तेजी से सुलझेंगे।

नई प्रणाली में मापी शुल्क भी स्पष्ट रूप से तय कर दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति खेसरा 500 रुपये और शहरी इलाकों में प्रति खेसरा 1000 रुपये शुल्क लिया जाएगा। अगर कोई आवेदक तत्काल मापी कराना चाहता है तो उसे तय शुल्क का दोगुना भुगतान करना होगा।

लंबित मामलों के जल्द निपटारे के लिए 26 जनवरी से 31 मार्च 2026 तक राज्यभर में ‘मापी महाअभियान’ चलाया जाएगा। इस अभियान के दौरान अधिक से अधिक लंबित मामलों को निपटाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर विशेष सर्वेक्षण अमीनों की तैनाती भी की जाएगी।

अब मापी रिपोर्ट भी विभाग द्वारा तय किए गए मानक प्रारूप में ही जमा करनी होगी। इसमें आवेदक और जमीन का पूरा विवरण, चेकलिस्ट, नजरी नक्शा, साक्षियों की जानकारी और अमीन के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। सरकार को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से भूमि मापी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी, तेज और भरोसेमंद बनेगी।

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