बेंगलुरु के वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि: नई जिंक-आयन बैटरी तकनीक से सस्ती और सुरक्षित एनर्जी स्टोरेज का रास्ता साफ
बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज के वैज्ञानिकों ने ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि हासिल की है, जो भविष्य में सस्टेनेबल और बड़े पैमाने पर ऊर्जा संग्रहण को नई दिशा दे सकती है। शोधकर्ताओं ने सल्फर वैकेंसी इंड्यूस्ड 1T-फेज मोलिब्डेनम डाइसल्फाइड यानी 1T-MoS₂ पर आधारित एक उन्नत कैथोड मटेरियल विकसित किया है, जो एक्वस जिंक-आयन बैटरियों की कार्यक्षमता और स्थिरता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाता है। यह खोज खासतौर पर उन देशों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जो सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों को बड़े स्तर पर अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
यह संस्थान डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के अधीन कार्य करता है और लंबे समय से उन्नत पदार्थ विज्ञान पर शोध कर रहा है। इस परियोजना में शामिल वैज्ञानिकों ने हाइड्रोथर्मल तकनीक का उपयोग करते हुए सावधानीपूर्वक सल्फर की कमी वाले 1T-फेज MoS₂ नैनोफ्लेक्स तैयार किए। इस विशेष संरचना के कारण मटेरियल का सरफेस एरिया अधिक हो जाता है, जिससे आयनों की आवाजाही आसान होती है और इलेक्ट्रोकेमिकल रिएक्शन तेज हो जाते हैं। परिणामस्वरूप बैटरी अधिक चार्ज स्टोर कर पाती है और जिंक आयनों का डिफ्यूजन बेहतर तरीके से संभव होता है।
शोध टीम ने बैटरी की इलेक्ट्रोकेमिकल पोटेंशियल विंडो को भी सावधानीपूर्वक अनुकूलित किया और पाया कि 0.2 से 1.3 वोल्ट की रेंज सबसे प्रभावी है। इस ऑप्टिमाइजेशन के बाद बैटरी ने असाधारण प्रदर्शन दिखाया। 1 एंपियर प्रति ग्राम की करंट डेंसिटी पर 500 चार्ज और डिस्चार्ज साइकिल के बाद भी लगभग 97.91 प्रतिशत शुरुआती क्षमता बरकरार रही। यह उच्च साइक्लिक स्थिरता दर्शाता है कि बैटरी लंबे समय तक भरोसेमंद तरीके से काम कर सकती है।
इसके अलावा कूलम्बिक एफिशिएंसी लगभग 99.7 प्रतिशत दर्ज की गई, जो यह संकेत देती है कि साइड रिएक्शन बहुत कम हैं और चार्जिंग-डिस्चार्जिंग प्रक्रिया अत्यंत रिवर्सिबल है। इस तकनीक की व्यावहारिक उपयोगिता को प्रदर्शित करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक कॉइन-सेल प्रोटोटाइप तैयार किया, जिसने एक कमर्शियल एलसीडी टाइमर को सफलतापूर्वक पावर दिया। यह प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि यह तकनीक प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वास्तविक जीवन में भी उपयोगी साबित हो सकती है।
यह नवाचार ऊर्जा भंडारण की लागत को कम करने और उसे अधिक सुरक्षित तथा पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जिंक-आयन बैटरियां लिथियम-आयन विकल्पों की तुलना में अधिक सुरक्षित और सस्ती हो सकती हैं, जिससे ग्रिड स्तर पर रिन्यूएबल एनर्जी का इंटीग्रेशन आसान होगा।
इस उपलब्धि के साथ भारत ने क्लीन एनर्जी और उन्नत बैटरी तकनीक के क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। भविष्य में यदि इस तकनीक का बड़े पैमाने पर व्यावसायीकरण होता है, तो यह देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित विकास के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
