इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के पांचवें दिन साझा घोषणा पत्र अपनाने की तैयारी, वैश्विक एआई शासन पर होगी बड़ी घोषणा
नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 अपने निर्णायक चरण में पहुंच गया है। शिखर सम्मेलन के पांचवें दिन आज नेताओं द्वारा एक साझा घोषणा पत्र को अपनाया जाना प्रस्तावित है, जिसमें वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के शासन और सहयोग को लेकर सामूहिक प्रतिबद्धताओं की रूपरेखा प्रस्तुत की जाएगी। यह घोषणा पत्र भविष्य में एआई के जिम्मेदार, सुरक्षित और समावेशी उपयोग के लिए दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है।
सम्मेलन के दौरान उच्च स्तरीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर वैश्विक साझेदारी यानी Global Partnership on Artificial Intelligence परिषद की बैठकें भी आयोजित की जा रही हैं। इन बैठकों में सदस्य देश एआई से जुड़े नीतिगत मुद्दों, नैतिक मानकों और तकनीकी सहयोग पर गहन चर्चा कर रहे हैं। परिषद का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एआई तकनीक का विकास मानव-केंद्रित मूल्यों और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरूप हो।
पांच दिनों से चल रहे इस भव्य आयोजन में दुनिया भर से 500 से अधिक एआई विशेषज्ञ और नेता भाग ले रहे हैं। इनमें 100 से अधिक स्टार्टअप संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, 150 से अधिक शिक्षाविद और शोधकर्ता तथा लगभग 400 मुख्य तकनीकी अधिकारी शामिल हैं। इतने विविध और अनुभवी प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने सम्मेलन को वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण मंच बना दिया है, जहां न केवल तकनीकी नवाचार बल्कि नीति निर्माण और सहयोग की संभावनाओं पर भी गंभीर विचार हो रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन करते हुए विश्व के नेताओं और प्रतिनिधियों का स्वागत किया था। अपने संबोधन में उन्होंने एआई को मानवता की प्रगति का साधन बताते हुए इसके जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत एआई के क्षेत्र में नवाचार, शोध और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और वैश्विक साझेदारी के माध्यम से इस दिशा में ठोस कदम उठा रहा है।
सम्मेलन के साथ आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो भी प्रतिभागियों और आगंतुकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां अत्याधुनिक एआई समाधान, स्टार्टअप नवाचार, रोबोटिक्स, मशीन लर्निंग एप्लिकेशन और स्मार्ट गवर्नेंस से जुड़े मॉडल प्रदर्शित किए जा रहे हैं। प्रदर्शकों और नवोन्मेषकों को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है, जिससे स्पष्ट है कि एआई अब केवल शोध का विषय नहीं रहा बल्कि व्यावहारिक जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है।
पांचवें दिन प्रस्तावित साझा घोषणा पत्र के साथ यह उम्मीद की जा रही है कि एआई के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को नई दिशा मिलेगी। जिम्मेदार और समावेशी एआई के लिए बहुपक्षीय प्रतिबद्धता आने वाले वर्षों में तकनीकी विकास को संतुलित और मानव हितों के अनुरूप बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
