भारत-फ्रांस विमानन साझेदारी को नई ऊंचाई, राम मोहन नायडू और फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल में अहम बातचीत
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने फ्रांस के परिवहन मंत्री फिलिप टाबारोट के नेतृत्व में आए फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की। यह बैठक फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत की आगामी राजकीय यात्रा से ठीक पहले हुई, जिसे दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुलाकात के बाद उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल से मिलना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने बताया कि बैठक में भारत और फ्रांस के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ।
बैठक में तेजी से बदलते विमानन परिदृश्य को देखते हुए सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल यानी एसएएफ और एडवांस्ड एयर मोबिलिटी जैसी आधुनिक और भविष्य की तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि शहरीकरण की बढ़ती रफ्तार और बेहतर कनेक्टिविटी की जरूरतों को पूरा करने के लिए इन क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि विमानन सेक्टर को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए राम मोहन नायडू ने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर एक मजबूत विमानन शक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए फ्रांस के साथ मिलकर एक सशक्त विमानन कौशल और प्रशिक्षण इकोसिस्टम विकसित करना बेहद जरूरी है, जिससे आने वाले वर्षों में कुशल मानव संसाधन तैयार हो सके।
यह बैठक भारत और फ्रांस के बीच विमानन क्षेत्र में बढ़ते सहयोग की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी में राफेल लड़ाकू विमान, सिविल एविएशन और अंतरिक्ष तकनीक जैसे अहम क्षेत्र पहले से शामिल हैं और अब इसमें पर्यावरण-अनुकूल विमानन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि भारत का नागरिक उड्डयन बाजार दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल है। हाल ही में आयोजित विंग्स इंडिया 2026 कार्यक्रम में फ्रांस समेत 20 देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने हिस्सा लिया था, जहां हवाई कनेक्टिविटी, सस्टेनेबिलिटी और एमआरओ जैसे विषयों पर व्यापक मंथन हुआ। मंत्री ने कहा कि एसएएफ जीवाश्म ईंधन का एक प्रभावी विकल्प है, जो विमानन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जबकि ई-वीटीओएल और ड्रोन आधारित शहरी हवाई परिवहन भविष्य की कनेक्टिविटी जरूरतों को पूरा करने में सहायक होंगे।
