होर्मुज संकट के बीच भारत में LPG और PNG सप्लाई मजबूत, सरकार ने उठाए बड़े कदम

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पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच भारत सरकार ने देश में एलपीजी और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। सरकार के अनुसार, वैश्विक हालात के असर के बावजूद देश में एलपीजी की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य बनी हुई है और उपभोक्ताओं को किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।

हाल के दिनों में एलपीजी सिलेंडर की मांग में अचानक तेजी देखने को मिली है। ऑनलाइन बुकिंग में करीब 95 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह साफ होता है कि उपभोक्ताओं में सतर्कता और मांग दोनों बढ़ी हैं। इसके बावजूद वितरण व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है और लाखों सिलेंडर समय पर उपभोक्ताओं तक पहुंचाए जा रहे हैं। एक ही दिन में करीब 51 लाख घरेलू एलपीजी सिलेंडर वितरित किए गए, जो आपूर्ति तंत्र की मजबूती को दर्शाता है।

सरकार ने हेराफेरी और अनियमितताओं पर लगाम लगाने के लिए डिलीवरी प्रमाणीकरण कोड प्रणाली को भी मजबूत किया है। फरवरी 2026 में जहां यह व्यवस्था 53 प्रतिशत तक सीमित थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर लगभग 89 प्रतिशत तक पहुंचा दिया गया है। इससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि गैस सिलेंडर सही उपभोक्ता तक पारदर्शी तरीके से पहुंचे।

वाणिज्यिक एलपीजी की बात करें तो सरकार ने संकट के बीच भी आवश्यक क्षेत्रों के लिए आपूर्ति बनाए रखने के कदम उठाए हैं। रिफाइनिंग कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य वितरण और पेट्रोकेमिकल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए न्यूनतम मात्रा में गैस उपलब्ध कराएं। कुल वाणिज्यिक आवंटन को पहले के स्तर के करीब 70 प्रतिशत पर बनाए रखने का निर्णय लिया गया है, ताकि आवश्यक सेवाओं पर कोई असर न पड़े।

छोटे 5 किलोग्राम वाले एफटीएल सिलेंडरों की बिक्री में भी तेजी आई है। लाखों सिलेंडर बाजार में उपलब्ध कराए गए हैं, जिन्हें किसी भी वैध पहचान पत्र के साथ आसानी से खरीदा जा सकता है। इससे उन उपभोक्ताओं को राहत मिली है, जिन्हें तत्काल गैस की जरूरत होती है।

प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में भी सरकार ने आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्थित किया है। घरेलू पाइप्ड गैस और सीएनजी परिवहन क्षेत्र को पूरी आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। औद्योगिक उपभोक्ताओं को उनकी औसत खपत के लगभग 80 प्रतिशत तक गैस दी जा रही है, जबकि उर्वरक संयंत्रों को भी पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने की योजना पर काम हो रहा है। आने वाले दिनों में गैस आपूर्ति में और बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।

सरकार ने पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए भी कई पहल की हैं। गैस वितरण कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे घरों, होटलों, रेस्तरां और सामुदायिक रसोई तक पाइप्ड गैस पहुंचाने को प्राथमिकता दें। इसके साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से गैस नेटवर्क के विस्तार के लिए जरूरी अनुमोदनों में तेजी लाने को कहा गया है।

इन सभी कदमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत में ऊर्जा आपूर्ति पर कोई बड़ा असर न पड़े। सरकार का ध्यान केवल मौजूदा जरूरतों को पूरा करने पर ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक मजबूत और लचीला गैस इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर भी है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूती मिल सके।

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