शिवराज सिंह चौहान का बड़ा बयान: भारत में खाद्यान्न उत्पादन 357 मिलियन टन के रिकॉर्ड पर, दुनिया का ‘फूड बास्केट’ बनने की ओर देश
केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने देश की कृषि उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत ने खाद्यान्न उत्पादन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने बताया कि देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन बढ़कर लगभग 357 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है, जो भारत की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय दोनों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में लगातार सुधार और नई नीतियों के कारण भारत आज वैश्विक स्तर पर एक मजबूत कृषि शक्ति के रूप में उभर रहा है। उन्होंने बताया कि चावल उत्पादन के मामले में भारत ने करीब 150 मिलियन टन से अधिक उत्पादन के साथ चीन को पीछे छोड़ दिया है और दुनिया में पहला स्थान हासिल किया है। इसके साथ ही गेहूं, सरसों, सोयाबीन और मूंगफली जैसी प्रमुख फसलों में भी रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया गया है, जिससे देश की कृषि क्षमता का दायरा और बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब भारत को पीएल-480 समझौते के तहत विदेशों से गेहूं आयात करना पड़ता था, लेकिन आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। वर्तमान समय में देश के गोदामों में गेहूं और चावल का भंडार इतना अधिक है कि सरकार को उनके भंडारण की व्यवस्था को लेकर भी योजना बनानी पड़ रही है। मंत्री के अनुसार यह बदलाव भारतीय किसानों की मेहनत और सरकार की नीतियों का परिणाम है, जिसकी सराहना अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी की जा रही है।
कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए फलों, सब्जियों और दालों के उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि दालों का उत्पादन पहले लगभग 19 मिलियन टन के आसपास था, जो अब बढ़कर करीब 25 से 26 मिलियन टन तक पहुंच गया है। वहीं बागवानी उत्पादन भी 369 मिलियन टन से अधिक के स्तर पर पहुंच चुका है, जो किसानों के लिए आय का एक बड़ा स्रोत बन रहा है।
उन्होंने प्राकृतिक खेती मिशन का जिक्र करते हुए कहा कि इस पहल के माध्यम से सरकार रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग को कम करने तथा मिट्टी की सेहत को सुधारने पर काम कर रही है। गंगा जैसी प्रमुख नदियों के किनारे बड़े क्षेत्रों में रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है और लाखों किसानों को इसके लिए प्रशिक्षित किया गया है। मंत्री ने कहा कि सही तरीके से प्राकृतिक खेती अपनाने पर उत्पादन घटता नहीं बल्कि कई मामलों में बढ़ जाता है, क्योंकि इससे मिट्टी की गुणवत्ता और जैविक कार्बन में सुधार होता है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में स्थानीय संसाधनों का उपयोग प्रमुख भूमिका निभाता है। किसान देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से तैयार घनजीवामृत, बीजामृत और नीमास्त्र जैसी पारंपरिक तकनीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके साथ-साथ इंटरक्रॉपिंग जैसे तरीकों से एक ही खेत में कई तरह की फसलें उगाकर उत्पादन और आय दोनों बढ़ाई जा सकती हैं। सरकार किसानों को प्रति एकड़ प्रोत्साहन भी दे रही है ताकि वे इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित हों।
कृषि मंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में भारत का कृषि उत्पादन हरित क्रांति के शुरुआती दौर की तुलना में कई गुना बढ़ चुका है और विकास की रफ्तार भी पहले से तेज हो गई है। उनके अनुसार 2014–15 के बाद से खाद्यान्न उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल देश की खाद्य जरूरतों को पूरा करना नहीं बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद खाद्य आपूर्तिकर्ता बनाना भी है। इसी दिशा में काम करते हुए भारत को दुनिया का फूड बास्केट बनाने का लक्ष्य रखा गया है ताकि देश विश्व स्तर पर भी खाद्य सुरक्षा में योगदान दे सके।
