कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर से नीचे, आईईए के इमरजेंसी रिजर्व प्रस्ताव और अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव
वैश्विक ऊर्जा बाजार में बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली और अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी द्वारा इमरजेंसी रिजर्व से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने की संभावित योजना एक बड़ी वजह है। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी टकराव के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था, लेकिन अब अतिरिक्त आपूर्ति की संभावना ने बाजार को कुछ राहत दी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी यानी International Energy Agency वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अपने इमरजेंसी भंडार से कच्चे तेल की आपूर्ति करने पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के उद्देश्य से उठाया जा सकता है। इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय संकट के समय इस तरह के भंडार का उपयोग किया जा चुका है।
बताया जा रहा है कि प्रस्तावित आपूर्ति की मात्रा काफी बड़ी हो सकती है। अनुमान है कि यह 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के बाद दो चरणों में जारी किए गए 182 मिलियन बैरल से भी अधिक हो सकती है। उस समय वैश्विक ऊर्जा बाजार में अचानक आई उथल-पुथल के बाद कई देशों ने मिलकर आपूर्ति बढ़ाने का फैसला लिया था ताकि तेल की कीमतों में असामान्य तेजी को रोका जा सके। इस बार भी जी7 देशों ने आईईए से ऐसी स्थिति के लिए तैयार रहने का अनुरोध किया है।
इन खबरों के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब एक प्रतिशत गिरकर लगभग 86.93 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी West Texas Intermediate crude oil के वायदा भाव में भी लगभग 0.75 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह करीब 82.82 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया।
कुछ ही समय पहले वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था। इसका मुख्य कारण मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम थे। होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में गिना जाता है, क्योंकि वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है। हाल ही में इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने और इसके अस्थायी रूप से बंद होने की खबरों के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत तक की तेजी देखी गई थी और यह 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था।
बाजार में हालिया गिरावट की एक वजह अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump का बयान भी माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है। हालांकि जमीनी हालात अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं और दोनों देशों के बीच तनाव जारी है। यह टकराव अब दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और समाधान की दिशा में फिलहाल कोई ठोस संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं।
इस बीच ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने की संभावित तैयारी से जुड़ी खबरों ने भी चिंता बढ़ा दी है। इन रिपोर्ट्स के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जलडमरूमध्य में कोई बारूदी सुरंगें लगाई गई हैं तो उन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा कदम क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
वैश्विक ऊर्जा बाजार फिलहाल बेहद संवेदनशील स्थिति में है और निवेशकों की नजरें आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक और रणनीतिक फैसलों पर टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इमरजेंसी रिजर्व से आपूर्ति बढ़ाने का निर्णय लिया जाता है तो इससे तेल बाजार में कुछ स्थिरता आ सकती है, लेकिन मध्य पूर्व में जारी तनाव लंबे समय तक कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
