जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी का दूसरा दौर आने की चेतावनी, 10 जिलों में अलर्ट जारी

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जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में बर्फबारी का सिलसिला जारी है और इसी बीच मौसम विभाग ने भारी बर्फबारी के एक और दौर को लेकर चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार 1 फरवरी से उधमपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में बारिश और बर्फबारी की संभावना है, जिसके मद्देनजर कुल 10 जिलों में अलर्ट घोषित किया गया है। बदलते मौसम के बीच प्रशासन और मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक श्रीनगर में न्यूनतम तापमान 1.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जो एक महीने से अधिक समय बाद शून्य से ऊपर रहा। गुलमर्ग में तापमान माइनस 9 डिग्री सेल्सियस और पहलगाम में माइनस 5.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं जम्मू शहर में भी मौसम में कुछ सुधार देखने को मिला, जहां न्यूनतम तापमान 9.3 डिग्री सेल्सियस रहा। कटरा में 8.4 डिग्री, बटोटे में 3.2 डिग्री, बनिहाल में 1.1 डिग्री और भद्रवाह में माइनस 1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह बर्फबारी अहम मानी जा रही है। जम्मू-कश्मीर में आमतौर पर 40 दिनों की अवधि में अधिकतर बर्फबारी होती है, लेकिन इस बार आखिरी हफ्ते को छोड़ दें तो घाटी में अपेक्षाकृत कम बर्फ पड़ी है। पीने के पानी और सिंचाई की जरूरतें इन्हीं दिनों में ऊपरी इलाकों में जमा होने वाली बर्फ पर निर्भर करती हैं। हालिया बर्फबारी से पहले घाटी की ज्यादातर नदियां, झरने और अन्य जल स्रोत अपने न्यूनतम स्तर पर बह रहे थे, जिससे जल संकट की आशंका बढ़ गई थी।

मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि जम्मू-कश्मीर में एक और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय होने वाला है, जिसके असर से 1 फरवरी को कई इलाकों में बारिश और बर्फबारी हो सकती है। इसी को देखते हुए किसानों को 2 फरवरी तक खेती से जुड़े काम रोकने की सलाह दी गई है। यात्रियों और ट्रांसपोर्टरों को श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे पर सफर करने से पहले ट्रैफिक कंट्रोल रूम से सड़क की स्थिति की जानकारी लेने की हिदायत दी गई है।

बर्फबारी वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अगले 75 घंटों तक केवल बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलने की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार वेस्टर्न डिस्टर्बेंस भूमध्यसागरीय क्षेत्र से उठने वाला एक एक्स्ट्रा ट्रॉपिकल सिस्टम है, जो भारत, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश में बारिश और बर्फबारी लेकर आता है। इन क्षेत्रों में रबी फसल की संभावनाएं भी काफी हद तक वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की गतिविधियों पर निर्भर करती हैं।

मौसम के ताजा अनुमान को देखते हुए प्रशासन ने यात्रियों और ट्रांसपोर्टरों से अपील की है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले संबंधित ट्रैफिक विभागों से सड़कों और हाईवे की स्थिति की पुष्टि जरूर करें। साथ ही आम जनता को बर्फ से ढके इलाकों और हिमस्खलन संभावित ऊंचे क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी गई है।

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