एलपीजी सप्लाई को लेकर सरकार का बड़ा बयान, उत्पादन में 28% बढ़ोतरी, जमाखोरी रोकने के लिए सख्त कदम

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देश में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर फैल रही आशंकाओं के बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू गैस की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है और आम उपभोक्ताओं को किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि हाल के दिनों में रिफाइनरियों को दिए गए निर्देशों के बाद एलपीजी उत्पादन में करीब 28 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। इसके साथ ही अतिरिक्त एलपीजी की खरीद भी सक्रिय रूप से की जा रही है, ताकि देश के किसी भी हिस्से में सप्लाई बाधित न हो।

मंत्री ने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि देश के 33 करोड़ से अधिक परिवारों, खासकर गरीब और वंचित वर्ग की रसोई में गैस की उपलब्धता लगातार बनी रहे। उन्होंने बताया कि घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक का औसत समय फिलहाल लगभग ढाई दिन है और यह अवधि पहले की तरह ही सामान्य बनी हुई है। इससे साफ है कि सप्लाई चेन पर किसी तरह का संकट नहीं है।

उन्होंने यह भी बताया कि कुछ क्षेत्रों से यह जानकारी सामने आई है कि कुछ डिस्ट्रीब्यूटर या उपभोक्ता स्तर पर घबराहट के कारण ज्यादा बुकिंग या सिलेंडर जमा करने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। हालांकि यह स्थिति किसी वास्तविक कमी की वजह से नहीं बल्कि लोगों की आशंकाओं के कारण पैदा हुई है। सरकार ऐसे मामलों पर नजर रख रही है और जमाखोरी या काला बाजारी को रोकने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

डिलीवरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड प्रणाली को तेजी से लागू किया जा रहा है। फिलहाल यह व्यवस्था लगभग 50 प्रतिशत उपभोक्ताओं के लिए लागू है और इसे बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक पहुंचाने की योजना है। इस प्रणाली के तहत सिलेंडर की डिलीवरी तभी दर्ज होगी जब उपभोक्ता के मोबाइल पर आए वन-टाइम कोड से इसकी पुष्टि की जाएगी। इससे गलत डिलीवरी या किसी भी तरह की हेराफेरी को रोकना आसान होगा।

मांग को संतुलित रखने के लिए शहरी क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिनों का अंतर रखा गया है, जबकि ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में यह अंतर 45 दिनों का निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही तेल कंपनियों के अधिकारी और एंटी-अडल्टरेशन सेल डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर निगरानी कर रहे हैं। राज्य प्रशासन के साथ भी समन्वय बढ़ाने के लिए संबंधित अधिकारियों की बैठकें आयोजित की गई हैं।

कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को लेकर भी सरकार ने व्यवस्था स्पष्ट की है। मंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि जमाखोरी और काला बाजारी को रोकना है। कमर्शियल एलपीजी बाजार आधारित कीमत पर बेची जाती है और इसमें किसी तरह की सब्सिडी नहीं दी जाती। अगर इसकी बिक्री पूरी तरह खुली छोड़ दी जाती तो कई सिलेंडर अवैध बाजार में भेजे जा सकते थे, जिससे असली उपभोक्ताओं को नुकसान होता।

सरकार ने बताया कि तेल कंपनियों की एक तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है जो विभिन्न क्षेत्रों में कमर्शियल एलपीजी की वास्तविक मांग का आकलन कर रही है। इसके आधार पर तेल कंपनियां औसत मासिक मांग का 20 प्रतिशत हिस्सा आवंटित करेंगी ताकि आपूर्ति संतुलित बनी रहे और काला बाजारी को रोका जा सके।

कीमतों को लेकर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। हाल ही में 60 रुपये के समायोजन के बाद बिना सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपये तय की गई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से इसकी कीमत लगभग 987 रुपये होनी चाहिए थी। सरकार ने उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े इसके लिए इस अंतर का बड़ा हिस्सा खुद वहन किया है। सरकार का कहना है कि इस फैसले से उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों पर पड़ने वाला अतिरिक्त खर्च प्रतिदिन एक रुपये से भी कम रहेगा।

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