मेघालय खदान विस्फोट के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन तेज, मृतकों की संख्या 27 पहुंची, अवैध खनन पर सख्ती
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मेघालय के थांग्सको क्षेत्र के म्यंसंगट में हुए खदान विस्फोट के बाद खोज और बचाव अभियान लगातार जारी है। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है और प्रशासन हर संभव प्रयास में जुटा हुआ है ताकि मलबे में फंसे लोगों का पता लगाया जा सके। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा मोचन बल, विशेष बचाव दल, जिला पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें घटनास्थल पर लगातार काम कर रही हैं। दुर्गम इलाके और खदानों की जटिल संरचना के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, लेकिन टीमें बिना रुके अभियान को आगे बढ़ा रही हैं।
तलाशी अभियान के दौरान शनिवार को दो और शव बरामद किए गए, जिसके बाद इस हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है। प्रशासन के मुताबिक अभी भी प्रभावित खदान स्थलों पर तलाशी का काम जारी है और आशंका है कि कुछ और लोग मलबे में दबे हो सकते हैं। हर बरामदगी के साथ स्थानीय लोगों में शोक की लहर और गहरी होती जा रही है।
इस गंभीर हादसे के बाद पूर्वी जयंतिया हिल्स जिला प्रशासन ने अवैध खनन के खिलाफ अभियान और तेज कर दिया है। जिला प्रशासन का कहना है कि अवैध खनन गतिविधियों पर सख्ती से लगाम लगाने के लिए मौके पर पांच अलग-अलग टीमें तैनात की गई हैं। इन टीमों में कार्यकारी मजिस्ट्रेट, पुलिस विभाग और खनिज संसाधन निदेशालय के अधिकारी शामिल हैं, जो पूरे क्षेत्र में निगरानी और कार्रवाई कर रहे हैं।
चलाए गए विशेष अभियान के तहत उमलावांग क्षेत्र में नौ अलग-अलग स्थानों से करीब 3,197 मीट्रिक टन कोयला जब्त किया गया है। वहीं उमथे क्षेत्र में चार स्थानों से 351 मीट्रिक टन कोयले को कब्जे में लिया गया। प्रशासन का कहना है कि यह कोयला अवैध खनन से जुड़ा हुआ था और इसके परिवहन व भंडारण के कोई वैध दस्तावेज मौजूद नहीं थे।
इससे पहले 6 फरवरी को भी इसी तरह का अभियान चलाया गया था, जिसमें सखैन-थांग्सको सड़क किनारे आठ स्थानों से औजारों और खनन उपकरणों के साथ लगभग 3,356 मीट्रिक टन कोयला जब्त किया गया था। इन कार्रवाइयों से यह साफ हो गया है कि क्षेत्र में अवैध खनन लंबे समय से जारी था।
इसके अलावा प्रशासन ने अवैध खनन से जुड़े अस्थायी शिविरों की पहचान कर उन्हें ध्वस्त कर दिया है। पुलिस ने अवैध खनन के मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिला प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए निगरानी और सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
