मध्य पूर्व हवाई क्षेत्र बंद होने से भारत में उड़ानों पर बड़ा असर, 1 मार्च को 444 फ्लाइट रद्द होने की आशंका

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मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और कई देशों द्वारा अपने हवाई क्षेत्र को अस्थायी रूप से बंद किए जाने का असर अब भारतीय विमानन सेवाओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA ने संकेत दिया है कि 1 मार्च को बड़े पैमाने पर उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं और लगभग 444 फ्लाइट रद्द होने की आशंका है। इससे एक दिन पहले, 28 फरवरी को ही घरेलू एयरलाइंस की 410 उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं, जिससे हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुईं।

ईरान और मध्य पूर्व के कुछ हिस्सों में हवाई क्षेत्र पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर परिचालन में गंभीर बाधा उत्पन्न हुई है। कई उड़ानों को या तो रद्द करना पड़ा या फिर उनका मार्ग बदलना पड़ा। इस स्थिति को देखते हुए प्रमुख भारतीय हवाई अड्डों को ऑपरेशनल अलर्ट पर रखा गया है ताकि संभावित रूट डायवर्जन और बढ़ते यात्री दबाव को संभाला जा सके। अधिकारियों के अनुसार यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए एयरलाइन कंपनियों, एयरपोर्ट प्रबंधन और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय किया जा रहा है।

यात्रियों की समस्याओं को देखते हुए मंत्रालय का यात्री सहायता नियंत्रण कक्ष सक्रिय रूप से काम कर रहा है। यात्रियों की शिकायतों और सवालों की निगरानी की जा रही है ताकि उन्हें जल्द से जल्द समाधान दिया जा सके। 28 फरवरी को एयरसेवा पोर्टल पर 216 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 105 शिकायतों का उसी अवधि में निपटारा भी कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि बाकी मामलों पर भी तेजी से कार्रवाई की जा रही है ताकि प्रभावित यात्रियों को राहत मिल सके।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को हवाई अड्डों पर तैनात किया गया है। टर्मिनलों पर भीड़ प्रबंधन, ग्राउंड हैंडलिंग, पार्किंग व्यवस्था और चालक दल के समन्वय जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। निजी हवाई अड्डा संचालकों और भारतीय विमानन प्राधिकरण को भी एयरलाइंस के साथ तालमेल बनाकर काम करने की सलाह दी गई है ताकि यात्रियों को कम से कम असुविधा हो।

इससे पहले नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय सेवाएं संचालित करने वाली भारतीय एयरलाइंस को निर्देश दिया था कि वे हवाई क्षेत्र से जुड़ी सभी एडवाइजरी, नोटिस टू एयरमेन और मार्ग प्रतिबंधों पर लगातार नजर रखें। वैश्विक सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत जहां आवश्यक हो वहां उड़ानों का समय पर पुनर्निर्देशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लिया जाएगा।

मौजूदा हालात ने यह साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर नागरिक उड्डयन क्षेत्र पर पड़ता है। लगातार बदलती परिस्थितियों के बीच एयरलाइंस और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। मंत्रालय ने कहा है कि हालात की सतत समीक्षा की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर आगे की जानकारी जारी की जाएगी।

फिलहाल यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी उड़ान की स्थिति नियमित रूप से जांचते रहें और एयरलाइंस के संपर्क में बने रहें। आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य होती है या नहीं, यह काफी हद तक मध्य पूर्व में विकसित हो रहे हालात पर निर्भर करेगा।

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