मुंगेर में तीन इनामी नक्सलियों का आत्मसमर्पण, बिहार पुलिस को बड़ी कामयाबी

बिहार में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही मुहिम को उस वक्त बड़ी मजबूती मिली जब मुंगेर में तीन सक्रिय नक्सलियों ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया. लंबे समय से पुलिस के लिए सिरदर्द बने नारायण कौड़ा और बहादुर कौड़ा, जिन पर तीन तीन लाख रुपये का इनाम घोषित था, बिहार के पुलिस महानिदेशक के सामने मुख्यधारा में लौट आए. उनके साथ एक और नक्सली विनोद कौड़ा ने भी आत्मसमर्पण किया, जिस पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे.
यह आत्मसमर्पण खड़गपुर के आरएसके कॉलेज मैदान में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान हुआ, जहां बिहार पुलिस के वरीय अधिकारी, नक्सल ऑपरेशन से जुड़े अफसर और स्थानीय प्रशासन मौजूद था. जैसे ही तीनों नक्सली मंच पर पहुंचे, उन्होंने अपने पास मौजूद हथियार, कारतूस और नक्सली सामग्री पुलिस को सौंप दी, जिससे साफ हो गया कि वे अब हिंसा का रास्ता छोड़ना चाहते हैं.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार नारायण कौड़ा और बहादुर कौड़ा नक्सली संगठन में हार्डकोर कैडर माने जाते थे और कई बड़ी वारदातों में उनकी भूमिका रही है. हत्या, लूट, विस्फोट और पुलिस पर हमले जैसे संगीन मामलों में दोनों लंबे समय से वांछित थे. लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियान और सुरक्षा बलों के दबाव ने इन्हें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया.
कार्यक्रम के दौरान बिहार के डीजीपी ने तीनों से सीधे बातचीत की और सरकार की पुनर्वास नीति की जानकारी दी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जो भी नक्सली हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटेगा, उसे सरकार की ओर से हर संभव मदद मिलेगी. आत्मसमर्पण करने वालों को तय नियमों के अनुसार पुनर्वास पैकेज, आर्थिक सहायता और सुरक्षा दी जाएगी ताकि वे नई शुरुआत कर सकें.
इस मौके पर एक भावनात्मक दृश्य भी देखने को मिला जब आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की पत्नियों को सम्मानित किया गया. पुलिस अधिकारियों ने कहा कि परिवार का सहयोग अक्सर नक्सलियों को हिंसा से दूर होकर सामान्य जीवन की ओर लौटने के लिए प्रेरित करता है. यह आत्मसमर्पण न सिर्फ सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता है बल्कि बिहार में शांति और विकास की दिशा में एक मजबूत कदम भी माना जा रहा है.
