सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने रचा इतिहास, वित्त वर्ष 2025-26 में 1.98 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड मुनाफा

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भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए बैंकिंग सेक्टर में एक नया इतिहास रच दिया है। सरकारी बैंकों ने इस दौरान 1.98 लाख करोड़ रुपए का अब तक का सबसे अधिक शुद्ध लाभ दर्ज किया है। यह लगातार चौथा साल है जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक लाभ में रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में किए गए सुधारों, मजबूत जोखिम प्रबंधन, डिजिटल तकनीक के विस्तार और ऋण वसूली की बेहतर व्यवस्था का असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है।

वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल कारोबार बढ़कर 283.3 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया। इसमें सालाना आधार पर 12.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। बैंकों की जमा राशि भी लगातार मजबूत हुई है और कुल डिपॉजिट 156.3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। वहीं, कुल ऋण वितरण में भी तेज बढ़ोतरी देखने को मिली और यह आंकड़ा 127 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इससे साफ है कि देश में आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं और उद्योगों, किसानों तथा छोटे व्यापारियों को पर्याप्त वित्तीय सहायता मिल रही है।

खुदरा ऋण, कृषि ऋण और एमएसएमई सेक्टर में सरकारी बैंकों की भूमिका काफी मजबूत हुई है। खुदरा ऋण में 18.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि कृषि क्षेत्र को दिए गए ऋण में 15.5 प्रतिशत और एमएसएमई क्षेत्र में 18.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इससे छोटे व्यापार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन को बड़ा समर्थन मिला है। सरकारी बैंक अब केवल पारंपरिक बैंकिंग तक सीमित नहीं हैं बल्कि देश की आर्थिक वृद्धि के महत्वपूर्ण भागीदार बनते जा रहे हैं।

बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। सकल एनपीए अनुपात घटकर 1.93 प्रतिशत पर आ गया है, जबकि शुद्ध एनपीए केवल 0.39 प्रतिशत रह गया है। यह अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। खराब ऋणों में कमी आने से बैंकों की वित्तीय स्थिति और मजबूत हुई है। सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 90 प्रतिशत से अधिक का प्रोविजनिंग कवरेज अनुपात बनाए रखा है, जिससे भविष्य के जोखिमों से निपटने की उनकी क्षमता और बेहतर हुई है।

वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकों की वसूली प्रक्रिया भी काफी प्रभावी रही। बट्टे खाते में डाले गए खातों से बड़ी रकम की रिकवरी हुई और कुल वसूली 86,971 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। इसके साथ ही परिचालन लाभ बढ़कर 3.21 लाख करोड़ रुपए हो गया। यह संकेत है कि सरकारी बैंक अब अधिक कुशलता और बेहतर प्रबंधन के साथ काम कर रहे हैं।

डिजिटल बैंकिंग और तकनीकी सुधारों ने भी इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है। ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल भुगतान, ऑटोमेशन और बेहतर डेटा प्रबंधन के कारण बैंकों की लागत में कमी आई है और ग्राहक सेवाएं पहले से अधिक मजबूत हुई हैं। लागत-से-आय अनुपात घटकर 49.67 प्रतिशत रह गया है, जो बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ती दक्षता को दर्शाता है।

सरकारी बैंकों की मजबूत पूंजी स्थिति, बढ़ती लाभप्रदता और बेहतर संस्थागत क्षमता आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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