स्वदेशी एयरो इंजन तकनीक पर जोर, राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ परियोजनाओं की समीक्षा की

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को गैस टरबाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट का दौरा कर स्वदेशी सैन्य गैस टरबाइन इंजन विकास से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बेंगलुरु स्थित इस संस्थान में उन्हें विकासाधीन परियोजनाओं, भारतीय उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग तथा सशस्त्र बलों को दी जा रही तकनीकी सहायता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने स्वदेशी इंजनों और उनके विभिन्न पुर्जों को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

इस दौरान रक्षा मंत्री ने वैज्ञानिकों और अधिकारियों से बातचीत करते हुए बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच एयरो इंजन तकनीक में आत्मनिर्भरता हासिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों का स्वदेशी विकास बेहद जरूरी है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय रक्षा क्षमताओं में स्वदेशी संचार प्रणालियों, निगरानी उपकरणों और हथियारों के उपयोग से आत्मनिर्भरता लगातार मजबूत हो रही है।

राजनाथ सिंह ने बताया कि एयरो इंजन तकनीक को सशक्त बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी जारी है, जिसमें यूनाइटेड किंगडम के साथ संयुक्त अध्ययन और फ्रांस के साथ राष्ट्रीय एयरो इंजन मिशन के तहत सहयोग शामिल है। उन्होंने एयरो इंजन विकास को जटिल और दीर्घकालिक प्रक्रिया बताते हुए वैज्ञानिकों से रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रयास तेज करने का आह्वान किया।

उन्होंने अगली पीढ़ी की उन्नत तकनीकों के विकास पर विशेष बल दिया, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और उन्नत सामग्रियों का उपयोग शामिल है, खासकर एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम के संदर्भ में। साथ ही उन्होंने उच्च तापमान वाले कंपोजिट तकनीकों की दोहरे उपयोग की क्षमता का भी उल्लेख किया, जो नागरिक उड्डयन, ऊर्जा उत्पादन और अंतरिक्ष क्षेत्र में भी उपयोगी साबित हो सकती हैं।

रक्षा मंत्री ने देश में एयरो इंजन निर्माण के लिए मजबूत राष्ट्रीय पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में तकनीकी प्रगति व्यापक आर्थिक विकास को भी गति देती है। इस दिशा में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन की भूमिका को उन्होंने बेहद महत्वपूर्ण बताया और कहा कि स्वदेशी तकनीक भारत को वैश्विक रक्षा नवाचार के अग्रणी देशों में स्थापित करने में मदद करेगी।

उन्होंने विश्वास जताया कि भारत तेजी से उन्नत रक्षा तकनीक विकसित कर आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहा है और आने वाले समय में यह क्षमता राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक मजबूती का भी आधार बनेगी।

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