एमएसई को 20 लाख रुपये तक मिलेगा कोलैटरल फ्री लोन, आरबीआई के नए निर्देश 1 अप्रैल 2026 से लागू
देश के सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक ने एमएसएमई सेक्टर को लेकर बड़ा फैसला करते हुए 20 लाख रुपये तक का कोलैटरल फ्री लोन देने की सीमा तय कर दी है। यानी अब सूक्ष्म और लघु उद्यमों को बैंक से लोन लेने के लिए किसी तरह की संपत्ति गिरवी रखने की जरूरत नहीं होगी। यह जानकारी आरबीआई की ओर से सोमवार को जारी सर्कुलर में दी गई है, जिसे उद्योग जगत के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
आरबीआई ने अपने सर्कुलर में बताया कि उसने “सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को लोन देने संबंधी संशोधन निर्देश 2026” जारी किए हैं। ये संशोधन पहले से लागू एमएसएमई लेंडिंग से जुड़े मुख्य दिशा-निर्देशों में बदलाव करते हैं, जिन्हें 23 जुलाई 2025 तक अपडेट किया गया था। नए नियमों के तहत अब सूक्ष्म और लघु उद्यम बिना किसी गारंटी के 20 लाख रुपये तक का लोन ले सकेंगे, जिससे छोटे कारोबारियों की वित्तीय दिक्कतें काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।
केंद्रीय बैंक ने साफ किया है कि यह संशोधित निर्देश 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे। आरबीआई का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन सूक्ष्म और लघु उद्यमों तक लोन की पहुंच बढ़ाना है, जिनके पास सीमित परिसंपत्तियां होती हैं और जो अक्सर गिरवी न होने की वजह से बैंक लोन से वंचित रह जाते हैं। नए नियमों से अंतिम छोर तक लोन वितरण को मजबूती मिलने की उम्मीद है, जिससे छोटे कारोबारी अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए जरूरी पूंजी आसानी से हासिल कर सकेंगे।
आरबीआई ने यह भी संकेत दिया है कि कुछ अन्य नियामकीय बदलावों के अनुरूप अतिरिक्त संशोधनों को अलग से अधिसूचित किया जाएगा। इससे यह साफ है कि आने वाले समय में एमएसएमई सेक्टर को लेकर और भी सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि कोलैटरल फ्री लोन की सीमा बढ़ने से न केवल नए उद्यम शुरू करने में मदद मिलेगी, बल्कि पहले से चल रहे छोटे कारोबार भी मजबूती के साथ आगे बढ़ पाएंगे।
गौरतलब है कि सरकार भी लगातार एमएसएमई उद्योगों को समर्थन देने के लिए कदम उठा रही है। बीते महीने सरकार ने डाक चैनल के जरिए होने वाले निर्यात को भी निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं से जोड़ दिया था। इससे उन छोटे उद्योगों को सीधा फायदा मिलेगा जो अपने उत्पादों का निर्यात डाक सेवाओं के माध्यम से करते हैं।
संचार मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार डाक विभाग ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड की अधिसूचनाओं के तहत डाक चैनल से किए गए निर्यातों पर शुल्क वापसी, निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों में छूट यानी आरओडीटीईपी और राज्य व केंद्रीय करों एवं शुल्कों पर छूट यानी आरओएससीटीएल जैसे लाभ 15 जनवरी 2025 से लागू कर दिए हैं।
कुल मिलाकर आरबीआई और सरकार के ये फैसले देश के सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए नई संभावनाओं के दरवाजे खोलते नजर आ रहे हैं। आसान लोन और निर्यात लाभों के जरिए छोटे उद्योगों को न सिर्फ आर्थिक मजबूती मिलेगी, बल्कि रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था को गति देने में भी अहम योगदान देखने को मिलेगा।
