आईटी शेयरों में भारी बिकवाली से सेंसेक्स 1,048 अंक टूटा, निफ्टी 25,471 पर बंद
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को तेज गिरावट दर्ज की गई और प्रमुख सूचकांक एक प्रतिशत से अधिक टूटकर बंद हुए। आईटी शेयरों में भारी बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों की धारणा दबाव में रही। बीएसई सेंसेक्स 1.25 प्रतिशत यानी 1,048 अंक गिरकर 82,626.76 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 1.30 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 336 अंक फिसलकर 25,471.10 पर आ गया।
बाजार में उतार चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिला। अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से पहले वैश्विक बाजारों में सतर्कता का माहौल रहा, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी प्रतिस्पर्धा और आईटी सेक्टर में संभावित दबाव को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी। आशंका जताई जा रही है कि श्रम लागत आधारित मॉडल पर निर्भर भारतीय आईटी कंपनियों को आने वाले समय में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।
निफ्टी आईटी इंडेक्स दिन के दौरान चार प्रतिशत से अधिक लुढ़क गया था, हालांकि निचले स्तरों से कुछ रिकवरी देखने को मिली और अंत में यह 1.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर के अनुसार सत्र के दौरान भारी उतार चढ़ाव रहा और शुरुआती सकारात्मकता टिक नहीं पाई। अमेरिका भारत व्यापार समझौते से जुड़ी उम्मीदें कमजोर पड़ने और वैश्विक जोखिम लेने की क्षमता घटने से बाजार दबाव में रहा।
बिकवाली केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.71 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.79 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी मेटल 3.31 प्रतिशत टूटकर सबसे बड़ा नुकसान उठाने वाला सेक्टर रहा। मजबूत डॉलर इंडेक्स और रूस पर संभावित प्रतिबंधों में राहत की अटकलों के कारण धातु कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी, जिससे मुनाफावसूली देखने को मिली।
निफ्टी रियल्टी 2.23 प्रतिशत फिसला, जबकि निफ्टी एफएमसीजी में 1.90 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी नेक्स्ट 50 भी 1.56 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। बैंकिंग और मिडकैप शेयरों में भी दबाव बना रहा। निफ्टी के 50 में से 44 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे बाजार की चौड़ाई स्पष्ट रूप से नकारात्मक रही।
इस बीच रुपया भी मामूली दबाव में रहा और छह पैसे कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 90.61 पर बंद हुआ। डॉलर इंडेक्स 97 के आसपास बना रहा, जिससे मुद्रा बाजार में सीमित दायरे में उतार चढ़ाव देखने को मिला। कुल मिलाकर निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और वैश्विक संकेतों पर आगे की दिशा निर्भर करेगी।
