तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 829 अंक टूटा और निफ्टी 23,639 पर बंद
वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ने के कारण बाजार में व्यापक बिकवाली देखने को मिली और प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबारी सत्र के अंत में निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का मूड काफी दबाव में दिखाई दिया।
दिनभर के कारोबार के बाद निफ्टी 0.95 प्रतिशत या 227.70 अंकों की गिरावट के साथ 23,639.15 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स में भी तेज गिरावट देखने को मिली और यह 1.08 प्रतिशत या 829.29 अंक टूटकर 76,034.42 के स्तर पर आकर बंद हुआ। बाजार में यह गिरावट लगभग सभी सेक्टरों में देखने को मिली, जिससे स्पष्ट हुआ कि निवेशकों में फिलहाल सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार निफ्टी के लिए नीचे की ओर 23,500 और 23,000 के स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माने जा रहे हैं। इन स्तरों पर मजबूत पुट ओपन इंटरेस्ट मौजूद है, जो अल्पकालिक आधार पर बाजार को कुछ सहारा दे सकता है। हालांकि ऊपर की ओर बढ़ने के लिए बाजार को कुछ महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस स्तरों को पार करना होगा। विश्लेषकों का मानना है कि 23,700 का स्तर फिलहाल निफ्टी के लिए पहला महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस है। इसके बाद 23,800 और फिर 24,000 का स्तर एक मजबूत सप्लाई जोन के रूप में सामने आ सकता है, जहां बिकवाली का दबाव बढ़ने की संभावना रहती है।
दिनभर के कारोबार में निफ्टी 50 में शामिल कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। विशेष रूप से ऑटो सेक्टर के शेयरों पर दबाव अधिक दिखाई दिया। महिंद्रा एंड महिंद्रा, आयशर मोटर्स और मारुति सुजुकी इंडिया जैसे प्रमुख ऑटोमोबाइल शेयरों में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली और ये दिन के सबसे बड़े नुकसान वाले शेयरों में शामिल रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं और गैस उपलब्धता को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का असर ऑटो सेक्टर की संभावनाओं पर पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रमों ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती आशंकाओं के कारण निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते हुए दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि कई सेक्टरों में एक साथ बिकवाली का दबाव बना रहा।
बाजार के व्यापक सूचकांकों पर भी गिरावट का असर देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.37 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स लगभग 0.69 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में दबाव केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी ऑटो इंडेक्स सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर साबित हुआ। ऑटो सेक्टर में आई इस गिरावट के पीछे ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चिंताएं और गैस सप्लाई पर संभावित प्रतिबंधों की आशंका को प्रमुख कारण माना जा रहा है। इसके अलावा निफ्टी एफएमसीजी और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में भी कमजोरी देखने को मिली।
हालांकि इस गिरावट के बीच कुछ सेक्टरों ने बेहतर प्रदर्शन भी किया। निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स दिन के कारोबार में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर बनकर उभरा। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई बढ़ोतरी से इस सेक्टर के शेयरों को समर्थन मिला और निवेशकों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई।
कुल मिलाकर बाजार में फिलहाल वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर साफ दिखाई दे रहा है, जिसके कारण निवेशक सतर्कता के साथ कारोबार कर रहे हैं।
