यूट्यूब के CEO नील मोहन अपने बच्चों को क्यों रखते हैं स्क्रीन से दूर? जानिए टेक दिग्गजों का ‘नो-स्क्रीन’ फॉर्मूला

आज के दौर में बच्चों और मोबाइल का रिश्ता किसी से छुपा नहीं है। यूट्यूब, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चे घंटों समय बिता रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिस यूट्यूब पर दुनिया भर के बच्चे चिपके रहते हैं, उसी यूट्यूब के सीईओ नील मोहन अपने बच्चों को स्क्रीन से दूर रखने की कोशिश करते हैं। हाल ही में टाइम मैगजीन द्वारा ‘CEO ऑफ द ईयर 2025’ चुने गए नील मोहन ने अपने घर के सख्त डिजिटल नियमों का खुलासा किया है।
नील मोहन का मानना है कि बच्चों को बिना सीमा के डिजिटल आज़ादी देना खतरनाक हो सकता है। टाइम मैगजीन को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनके घर में बच्चों के स्क्रीन टाइम को लेकर स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। वे तीन बच्चों के पिता हैं और कहते हैं कि पैरेंटिंग में परफेक्शन संभव नहीं है, लेकिन संतुलन बेहद जरूरी है।
नील मोहन के अनुसार, उनके घर में वीकडेज के दौरान स्क्रीन टाइम बेहद सीमित रहता है। स्कूल के दिनों में बच्चों को मोबाइल और सोशल मीडिया का बहुत कम समय मिलता है, जबकि वीकेंड पर थोड़ी ढील दी जाती है। उनका मानना है कि पढ़ाई, परिवार के साथ समय और आउटडोर गतिविधियां बच्चों के विकास के लिए ज्यादा जरूरी हैं।
बच्चों की मानसिक सेहत पर स्क्रीन टाइम का असर
नील मोहन ने साफ कहा कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों की नींद, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, भावनात्मक संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है। लगातार मोबाइल देखने से बच्चों में चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की कमी और सामाजिक दूरी बढ़ रही है। यही वजह है कि वे अपने बच्चों के डिजिटल इस्तेमाल पर कड़ी नजर रखते हैं।
इस सोच में नील मोहन अकेले नहीं हैं। कई विशेषज्ञ भी चेतावनी दे चुके हैं कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों के मानसिक विकास के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और ‘द एंग्ज़ायस जेनरेशन’ किताब के लेखक जोनाथन हैट का मानना है कि बच्चों को 14 साल से पहले स्मार्टफोन और 16 साल से पहले सोशल मीडिया नहीं देना चाहिए। उनका कहना है कि स्मार्टफोन बच्चों को ऐसे डिजिटल प्रभावों के सामने ला देता है, जिन पर माता-पिता का नियंत्रण नहीं रह जाता।
सरकारें और टेक लीडर्स भी सतर्क
बढ़ते खतरे को देखते हुए अब सरकारें भी कदम उठा रही हैं। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश बना है, जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इस फैसले को वहां की जनता का भी व्यापक समर्थन मिला है।
दिलचस्प बात यह है कि नील मोहन से पहले भी कई बड़े टेक लीडर्स अपने बच्चों को स्क्रीन से दूर रखने की बात कर चुके हैं। यूट्यूब की पूर्व CEO सुसान वोज्स्की, माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स और अरबपति बिजनेसमैन मार्क क्यूबन भी अपने बच्चों के स्क्रीन टाइम और ऐप एक्सेस पर सीमाएं तय करते रहे हैं।
कुल मिलाकर, यूट्यूब के CEO नील मोहन का यह नजरिया एक बड़ा संदेश देता है कि टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन बच्चों के भविष्य के लिए सीमाएं तय करना उससे भी ज्यादा जरूरी।
