अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर के पार

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया, जिससे निवेशकों और आयातक देशों की चिंता बढ़ गई है। दोनों देशों के बीच शांति वार्ता रद्द होने और संघर्ष विराम की संभावना कमजोर पड़ने के बाद सप्लाई चेन पर खतरा बढ़ गया है, जिसके चलते तेल की कीमतों में लगभग 2 प्रतिशत तक तेजी देखी गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा बढ़कर 107.28 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 1.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ 95.78 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया। यह उछाल केवल बाजार की तकनीकी प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे भू-राजनीतिक तनाव की गहरी चिंता जुड़ी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच स्थिति और बिगड़ती है, तो इसका सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ सकता है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी क्षेत्र से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न हिस्सों में पहुंचता है। यदि यहां आपूर्ति बाधित होती है, तो वैश्विक बाजार में कीमतों का और अधिक बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।
इस तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान में प्रस्तावित शांति वार्ता को रद्द करने का फैसला लिया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी देते हुए कहा कि प्रतिनिधियों की यात्रा रद्द कर दी गई है और अब ईरान को सीधे संपर्क करना चाहिए। इस बयान ने पहले से ही संवेदनशील माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि हालिया अमेरिकी कार्रवाई और रणनीतिक नाकेबंदी के कारण ईरान की सैन्य और औद्योगिक क्षमताओं को बड़ा नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार, ईरान की नौसेना और वायुसेना पहले की तुलना में काफी कमजोर हो चुकी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की मिसाइल निर्माण क्षमता पर भी असर पड़ा है, जिससे उसकी रणनीतिक स्थिति प्रभावित हुई है। हालांकि उन्होंने यह संकेत भी दिया कि भविष्य में दोनों देशों के बीच बातचीत फोन के माध्यम से संभव हो सकती है।
दूसरी ओर, ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में आकर बातचीत नहीं करेगा। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अमेरिकी कदम कूटनीतिक प्रतिबद्धताओं के अनुरूप नहीं हैं और इस प्रकार की नीति से विश्वास बहाल नहीं किया जा सकता। ईरान ने दोहराया कि वह अपनी संप्रभुता, राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। खासकर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई, परिवहन लागत और ईंधन कीमतों पर सीधा असर डालती हैं। आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार की नजर इसी तनाव और संभावित कूटनीतिक समाधान पर बनी रहेगी।
