कुकिंग गैस संकट के बीच सरकार का बड़ा प्लान, इंडक्शन हीटर उत्पादन बढ़ाकर घटाई जाएगी एलपीजी पर निर्भरता
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक सप्लाई चेन पर उसके असर को देखते हुए भारत सरकार अब कुकिंग गैस की खपत कम करने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है। इस दिशा में इंडक्शन हीटर और उससे जुड़े कुकिंग उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। हाल ही में इस विषय पर उच्च स्तर की बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया और संभावित चुनौतियों से निपटने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
सरकार का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका सीधा असर तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक उपायों को मजबूत करना होगा। इसी सोच के तहत इंडक्शन हीटर जैसे इलेक्ट्रिक कुकिंग विकल्पों को बढ़ावा देने की तैयारी की जा रही है, ताकि घरेलू स्तर पर एलपीजी पर निर्भरता कम की जा सके।
पिछले कुछ समय में इंडक्शन हीटर और अन्य इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की मांग में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। इसका एक बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता और संभावित सप्लाई बाधाएं हैं। सरकार इस मांग को अवसर के रूप में देखते हुए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना चाहती है, जिससे न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी बल्कि स्थानीय उद्योग को भी मजबूती मिलेगी।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए सरकार आयात पर पड़ने वाले असर का भी आकलन कर रही है। खासतौर पर तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की सप्लाई को लेकर चिंता जताई जा रही है। इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पहले ही कई पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क में कमी की गई है, ताकि बाजार में सप्लाई बनी रहे और कीमतों पर दबाव कम हो।
इसी बीच, कतर में एक बड़े एलएनजी प्लांट को नुकसान पहुंचने की खबर ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है, जो दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा संभालता है। इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे वैश्विक बाजार और भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ सकता है।
भारत ने इस चुनौती से निपटने के लिए अपने तेल और गैस आयात स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में कदम उठाए हैं। अब देश रूस के अलावा अफ्रीका के नाइजीरिया और अंगोला जैसे देशों से भी कच्चा तेल खरीद रहा है। साथ ही, अमेरिकी गैस सप्लाई पर भी ध्यान बढ़ाया गया है, ताकि ऊर्जा जरूरतों को संतुलित रखा जा सके।
वहीं, पश्चिम एशिया में संघर्ष को लेकर अनिश्चितता लगातार बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने हालात को और जटिल बना दिया है। अमेरिकी नेतृत्व ने कड़े कदम उठाने के संकेत दिए हैं, जबकि ईरान ने शांति प्रस्तावों को खारिज करते हुए उन्हें एकतरफा बताया है।
कुल मिलाकर, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां भारत के लिए एक चेतावनी के रूप में सामने आई हैं। ऐसे में सरकार का इंडक्शन कुकिंग को बढ़ावा देने का कदम न केवल ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देश को भविष्य की संभावित चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में भी एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
