झारखंड छात्र प्रदर्शन पर सियासत तेज, NDA सांसदों ने संसद परिसर में निकाला मार्च; विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप

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झारखंड में छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA के सांसदों ने संसद परिसर में मार्च निकाला। यह मार्च NDA संसदीय दल की साप्ताहिक मंगल मिलन बैठक के बाद आयोजित किया गया। इस दौरान सांसदों ने झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।

NDA नेताओं का आरोप है कि झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया, जबकि छात्र अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। सत्ता पक्ष के सांसदों ने इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष के रवैये पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह के सदन में इस मामले पर जवाब देने की तैयारी के बावजूद विपक्ष चर्चा के लिए तैयार नहीं है।

केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही को जानबूझकर बाधित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने पहले परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक का मुद्दा उठाया था और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की थी। सरकार ने उस मांग को स्वीकार भी किया, लेकिन इसके बाद भी विपक्ष संसद में चर्चा के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने विपक्ष के इस रुख को लेकर सवाल खड़े किए।

रांची से भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने भी झारखंड सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि झारखंड में छात्रों के मुद्दे को लेकर स्थिति गंभीर है और राज्य में बंद का माहौल है। सेठ ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भूमिका और कथित संवेदनहीनता पर भी सवाल उठाए।

भाजपा महासचिव और राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर छात्रों के मुद्दे को लेकर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। उन्होंने झारखंड में छात्रों के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। चुघ ने कहा कि छात्रों के साथ बल प्रयोग को स्वीकार नहीं किया जा सकता और देश इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।

नई दिल्ली से भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता एक ओर सरकार से अलग-अलग मुद्दों पर जवाब मांगते हैं, लेकिन दूसरी ओर संसद की कार्यवाही को बाधित करते हैं। उन्होंने कहा कि चर्चा के जरिए सरकार से सवाल पूछे जा सकते हैं और जवाब भी हासिल किए जा सकते हैं, लेकिन सदन की कार्यवाही बाधित करने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होती है।

झारखंड छात्र प्रदर्शन का मुद्दा अब संसद के भीतर भी राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। NDA के मार्च और नेताओं के बयानों से संकेत है कि सत्ता पक्ष इस मुद्दे को संसद में प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। वहीं विपक्ष का रुख भी आने वाले दिनों में इस विवाद को और राजनीतिक रूप दे सकता है। अब सबकी नजर संसद की आगामी कार्यवाही और झारखंड छात्र आंदोलन को लेकर होने वाली चर्चा पर है।

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