तीसरी तिमाही में बैंकों का मुनाफा बढ़ने की उम्मीद, एनआईएम स्थिर रहने का अनुमान

भारतीय बैंकों के लिए वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही यानी अक्टूबर से दिसंबर की अवधि बेहतर रहने की उम्मीद जताई गई है। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान बैंकों का मुनाफा सालाना आधार पर बढ़ सकता है, हालांकि शुद्ध ब्याज मार्जिन यानी एनआईएम के स्थिर रहने का अनुमान है।
सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत लोन ग्रोथ, फीस से होने वाली आय में बढ़ोतरी और कम क्रेडिट लागत के चलते बैंकिंग सेक्टर के मुनाफे में सुधार देखने को मिल सकता है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि आने वाले महीनों में भी कर्ज की मांग मजबूत बनी रहेगी। इसकी वजह ब्याज दरों में संभावित कटौती के साथ-साथ जीएसटी और इनकम टैक्स में राहत मिलने की उम्मीद से उपभोक्ता मांग में बढ़ोतरी होना बताया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक चौथी तिमाही में एनआईएम पर कुछ दबाव पड़ सकता है, लेकिन उसके बाद इसमें फिर से सुधार आने की संभावना है। मौजूदा लोन बुक में वृद्धि, असुरक्षित कर्ज से जुड़े जोखिमों के सामान्य होने और जमा की लागत घटने से क्रेडिट लागत में कमी आने की उम्मीद जताई गई है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार 12 दिसंबर 2025 तक बैंकिंग सिस्टम में एडवांस तिमाही आधार पर 4.5 प्रतिशत और सालाना आधार पर 11.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ज्यादातर बैंकों ने अपने मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए समय रहते बचत खातों और सावधि जमा पर ब्याज दरों में कटौती कर दी है। बचत खातों की ब्याज दरों में कमी का असर फंड की लागत पर तुरंत दिखा है, जबकि सावधि जमा की निश्चित ब्याज दरों का पुनर्मूल्यांकन धीरे-धीरे होगा, जिससे इसका फायदा आने वाली तिमाहियों में ज्यादा साफ दिखाई देगा।
एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि मौसमी कृषि उतार-चढ़ाव को छोड़ दिया जाए तो बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता स्थिर बनी रह सकती है। तीसरी तिमाही में स्थिर सुधार के संकेत मिलने की उम्मीद है, जिससे क्रेडिट लागत पर पड़ने वाला दबाव सीमित रहने में मदद मिलेगी।
