बिहार में नीतीश कुमार ने 10वीं बार संभाली कमान, गांधी मैदान में हुआ भव्य शपथ ग्रहण समारोह

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बिहार की राजनीति में बुधवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन की प्रचंड जीत के बाद नई सरकार के गठन की औपचारिक शुरुआत इसी भव्य समारोह से हुई। पटना का गांधी मैदान इस पूरे कार्यक्रम का गवाह बना, जहां हजारों कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद थे। समारोह सुबह 11:30 बजे शुरू हुआ और पूरे मैदान में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच राजनीतिक उत्साह साफ दिखाई दे रहा था।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ भाजपा के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) पद की शपथ ली। इसके अतिरिक्त एनडीए के कुल 25 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ग्रहण की, जिनमें भाजपा, जेडीयू और गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों के प्रतिनिधि शामिल थे। नई सरकार के मंत्रिमंडल में संतुलन साधने की कोशिश साफ दिखाई दी—युवा नेताओं से लेकर वरिष्ठ चेहरों तक, सभी को उचित स्थान देने का प्रयास हुआ है।

शपथ ग्रहण समारोह को और खास बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर के कई बड़े नेता पटना पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्रियों और एनडीए शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने नीतीश कुमार को शपथ ग्रहण के बाद बधाई दी और बिहार की प्रगति के लिए केंद्र सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

गांधी मैदान में आयोजित इस समारोह के लिए विशेष मंच तैयार किया गया था, जहाँ से एनडीए नेताओं ने जनता का अभिवादन स्वीकार किया। व्यवस्था को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके में ड्रोन निगरानी, पुलिस बल की तैनाती और ट्रैफिक डायवर्ज़न लागू किए। हजारों की भीड़ के बावजूद कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुचारू रूप से संपन्न हुआ।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कार्यकाल नीतीश कुमार के लिए कई मायनों में चुनौतीपूर्ण होगा। जनता ने उन्हें और एनडीए गठबंधन को भारी समर्थन देते हुए सत्ता सौंपी है, पर उनके सामने कानून-व्यवस्था को मजबूत करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार, तथा भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं। इसके साथ ही गठबंधन की आंतरिक एकजुटता बनाए रखना भी सरकार की प्राथमिकता में रहेगा।

वित्तीय मोर्चे पर भी नई सरकार की परीक्षा होगी। एनडीए ने चुनावी घोषणापत्र में कई बड़े वादे किए हैं, जिनके लिए राजस्व व्यय में वृद्धि अनिवार्य है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में कटौती किए बिना, महत्वाकांक्षी योजनाओं के लिए पर्याप्त धनराशि कैसे जुटाई जाए।

इसके बावजूद, शपथ ग्रहण समारोह के माहौल और जनता की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि बिहार एक नए राजनीतिक अध्याय में प्रवेश कर चुका है। विकास, सुशासन और स्थिरता—नई सरकार की प्राथमिकताएँ होंगी, और जनता की निगाहें आने वाले दिनों में सरकार की नीतियों और फैसलों पर टिकी रहेंगी।

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