रायपुर : विशेष लेख : सरकार का संकल्प – आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का निर्माण

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय अपनी सरलता, सहजता, दृढ़ता और ग्रामीण विकास के प्रति संवेदनशीलता के लिए जाने जाते हैं। उनका यह स्पष्ट मानना है कि छत्तीसगढ़ का वास्तविक सामर्थ्य गाँवों में निहित है, जहाँ परंपरा, कौशल और संसाधन प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। वे मानते हैं कि स्व-रोजगार ही आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे मजबूत माध्यम है। उनके नेतृत्व में सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि स्व-रोजगार योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक पहुंचे और कुटीर, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जाए।

खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री श्री गजेंद्र यादव -ग्रामोद्योग के पुनर्जागरण के निर्माता 

        श्री गजेंद्र यादव अपने ऊर्जा से भरे कार्यशैली, जमीनी समझ और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों के लिए पहचाने जाते हैं। वे लगातार यह प्रयास कर रहे हैं कि परंपरागत कौशलों को आधुनिक बाजार से जोड़ा जाए, जिससे स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को अधिक अवसर मिल सकें। उनकी पहल से कुटीर उद्योगों में नई संभावनाएँ विकसित हुई हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता का वातावरण मजबूत हुआ है। उनके नेतृत्व में खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने कई अभिनव कदम उठाए हैं, जिससे हजारों लोगों को आजीविका के नए साधन प्राप्त हुए हैं।

कुटीर उद्योगों को नई ऊर्जा देने वाली दो प्रमुख योजनाएँ 

 मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (CMEGP)  

        यह राज्य शासन की अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है जो मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के अजा, अजजा एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करती है। इस योजना का उद्देश्य उन लोगों को छोटे उद्योग स्थापित करने हेतु प्रेरित करना है, जो अपने कौशल के आधार पर सेवा या विनिर्माण क्षेत्रों में कारोबार शुरू करना चाहते हैं। सेवा क्षेत्र जैसे साइकिल और मोबाइल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रॉनिक/इलेक्ट्रिक मरम्मत, ब्यूटी पार्लर, फोटोकॉपी, वीडियोग्राफी, टेंट हाउस, च्वाइस सेंटर और होटल जैसी गतिविधियों में उद्यम स्थापित करने हेतु ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा एक लाख रूपए निर्धारित है।
        वहीं विनिर्माण क्षेत्र जैसे दोना-पत्तल निर्माण, फेब्रिकेशन, डेयरी उत्पाद, साबुन, मसाला, दलिया, पशुचारा, फ्लाई ऐश ब्रिक्स और नूडल्स निर्माण जैसे उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु 3 लाख रूपए तक का ऋण प्रदान किया जाता है। इन दोनों ही श्रेणियों में 35 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है, ताकि प्रारंभिक आर्थिक बोझ कम हो सके। योजना के अंतर्गत हितग्राही को केवल 5 प्रतिशत स्वयं का अंशदान करना होता है। यह योजना विशेषकर ग्रामीण युवाओं को उद्यम स्थापना के लिए प्रेरित करती है।

 प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)

         यह केंद्र शासन की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ में प्रभावी रूप से किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य विभिन्न वर्गों-अजा, अजजा, ओबीसी तथा सामान्य वर्ग को उद्यमिता के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराना है। इस योजना में सेवा क्षेत्र के लिए 20 लाख रूपए तक और विनिर्माण क्षेत्र के लिए 50 लाख रूपए तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे मध्यम स्तर के उद्यम भी आसानी से शुरू किए जा सकें।
           अनुदान की दृष्टि से यह योजना अत्यंत सहायक है। ग्रामीण क्षेत्रों के हितग्राहियों को 35 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाता है। सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को ग्रामीण क्षेत्र में 25 प्रतिशत तथा शहरी क्षेत्र में 15 प्रतिशत का अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। आवेदन प्रक्रिया पूर्णतः ऑनलाइन है, जिसे च्डम्ळच् पोर्टल के माध्यम से सरलता से भरा जा सकता है। यह योजना विशेष रूप से उन युवाओं के लिए है जो बड़े पैमाने पर उद्यम शुरू करने की क्षमता रखते हैं लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी से जूझते हैं।

आवेदन हेतु आवश्यक दस्तावेज 

         आवेदन करने वाले आवेदकों को कुछ आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं जिनमें पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र, ग्राम पंचायत से प्राप्त अनापत्ति प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, बैंक पासबुक की छायाप्रति और पैन कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा आवश्यकता पड़ने पर अन्य दस्तावेज भी जमा करने पड़ते हैं। ये दस्तावेज आवेदक की पात्रता और परियोजना की विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हैं।

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