शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन बड़ी गिरावट, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से सेंसेक्स 715 अंक टूटा

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू निवेशकों की धारणा पर साफ दिखाई दिया। कारोबार के दौरान बिकवाली का दबाव लगभग पूरे बाजार में बना रहा, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। लगातार तीसरे दिन आई इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
कारोबार समाप्त होने तक बीएसई सेंसेक्स 715 अंकों से अधिक फिसलकर 76,755.05 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी करीब 191 अंकों की गिरावट के साथ 23,996.25 पर आकर बंद हुआ। लगातार तीन कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स में लगभग 1,400 अंकों की गिरावट दर्ज की जा चुकी है, जबकि निफ्टी 50 भी 300 अंकों से अधिक कमजोर हुआ है। इससे साफ संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और वैश्विक परिस्थितियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
बाजार में सबसे अधिक दबाव कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिला। इंडिगो, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, इंफोसिस, एक्सिस बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, मैक्स हेल्थ और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसी कंपनियों के शेयरों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। इन दिग्गज शेयरों में बिकवाली का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखाई दिया। हालांकि कुछ चुनिंदा शेयरों ने मजबूती दिखाई, लेकिन उनका असर बाजार की समग्र दिशा बदलने के लिए पर्याप्त नहीं रहा।
व्यापक बाजार की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप दोनों सूचकांक एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए। इससे यह संकेत मिला कि बिकवाली केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों ने मुनाफावसूली और सतर्क रुख अपनाया।
सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो मीडिया, रियल्टी, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मा, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑयल एंड गैस, मेटल और एनर्जी सेक्टर में व्यापक कमजोरी देखने को मिली। विशेष रूप से मीडिया और रियल्टी सेक्टर में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशकों ने जोखिम वाले क्षेत्रों से दूरी बनानी शुरू कर दी है। दूसरी ओर एफएमसीजी सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए बढ़त दर्ज की, जबकि ऑटो सेक्टर भी मामूली मजबूती के साथ बंद हुआ। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में रक्षात्मक निवेश की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिसका सीधा असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ रहा है। भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देश के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई, आयात लागत और कॉरपोरेट मुनाफे पर दबाव बढ़ा सकता है। यही कारण है कि निवेशकों का रुख फिलहाल सतर्क बना हुआ है। आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
