मतदाता सूची और कानून-व्यवस्था पर आज भी बिहार विधानसभा में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन

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बिहार विधानमंडल के मॉनसून सत्र के तीसरे दिन आज भी राजद, कांग्रेस, भाकपा-माले सहित अन्य विपक्षी दलों ने बिहार विधानसभा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान और राज्य में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

विधानसभा के भीतर हंगामा जारी रहने के कारण अध्यक्ष नन्द किशोर यादव ने दोपहर दो बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी। इधर, विपक्षी दलों ने विधानसभा के मुख्य द्वार को अवरुद्ध कर दिया, जिससे सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा, “हमलोग गुंडाराज के राज्य में जी रहे हैं। मेरे पास एक महीने के अंदर का डाटा है। वोटबंदी में जनता के वोट चुराए जा चुके हैं और केवल घोषणा होना बाकी है। ये जो विधानसभा का सत्र चल रहा है, जनता मान चुकी है कि अब विधानसभा की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि दो करोड़ वोटरों का वोट चोरी हो चुका है और वोटर्स परेशान हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “जिन वोटरों के वोट चोरी किए गए हैं, उन्हें यह पता है कि आगामी विधानसभा चुनाव में वे अपने वोट का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। ऐसे में इन कारणों से विधानसभा में कल की तरह आज भी कार्यवाही चलने नहीं देंगे। ये आंदोलन विधानसभा में जारी है और इसके बाद रोड पर जारी रहेगा।”

राजद विधायक अख्तरुल इस्लाम शाहीन ने आरोप लगाया है कि वोटर पुनरीक्षण पर भाजपा और जदयू के लोग सदन में एक घंटा भी चर्चा नहीं होने देना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “देशभर में चर्चा हो रही है कि बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान के नाम पर करोड़ों लोगों का नाम मतदाता सूची से हटाया जा रहा है।”

इधर, सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा, “राजद के लोग गुंडाराज चलाना चाहते हैं और वह सदन में अपशब्दों का उपयोग कर रहे है। वोटर पुनर्निरीक्षण के नाम पर विपक्ष जनता को गुमराह कर रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “विधानसभा अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष को बोलने के लिए काफी समय दिया। नेता प्रतिपक्ष लंबे समय तक बोले। मुख्यमंत्री ने बड़े ही प्रेम से विपक्षी दलों को समझाने का यह प्रयास किया कि शांति से सदन को चलने दिया जाए और जनता के हित के प्रश्नों को पूछा जाए।”

उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा, “ये जंगलराज वाले लोग सदन के अंदर और बाहर गुंडाराज का प्रदर्शन कर रहे हैं। अब 90 का दशक नहीं है। विपक्षी दलों को लोकतंत्र में विश्वास नहीं है।”

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