अररिया में अमित शाह: बिहार चुनाव से पहले बीजेपी की चार दिवाली योजना

बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं । दिवाली का पर्व भी नज़दीक है। इस मौके को भुनाने की राजनीति भी जोरों पर आ गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को अररिया में हुए एक जनसभा में पहुंचे । उन्होंने कहा कि इस बार बिहार को चार दिवाली मनानी चाहिए। हर दिवाली किसी न किसी उपलब्धि या लक्ष्य का प्रतीक होगी।
शाह ने चारों दिवालियों का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा: पहली दिवाली वह है जब भगवान श्रीराम अयोध्या लौटे थे; दूसरी दिवाली का संबंध प्रधानमंत्री के द्वारा जीविका दीदियों के बैंक खातों में दिए गए 10-10 हजार रुपये से है; तीसरी दिवाली जीएसटी रिफॉर्म के कारण आई राहत का प्रतीक है, जब 395 से अधिक वस्तुओं पर कर दरें कम हुईं; और चौथी दिवाली तब मनाई जाएगी जब NDA–BJP बिहार में 160 से अधिक सीटें जीतकर सरकार बनाएगी।
आगे भाषण में अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि कुछ नेताओं के लिए यह चुनाव परिवारिक स्वार्थ साधने का है, जबकि भाजपा कार्यकर्ता इसे बिहार से घुसपैठियों को बाहर करने की मुहिम के रूप में देख रहे हैं। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे एनडीए को दो-तिहाई से अधिक बहुमत दिलाने में मदद करें।
दिवाली के आसपास चुनाव कराने की खबरों के बीच राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं — नेता प्रदेश के विभिन्न इलाकों में रैलियाँ कर रहे हैं और पार्टी संगठन बूथ स्तर पर तैयारियाँ कर रहे हैं। अमित शाह का यह संदेश त्योहार के भावनात्मक माहौल का लाभ उठाते हुए चुनावी संदेश भी देने का प्रयास माना जा रहा है।
विश्लेषकों के मुताबिक, त्योहार और चुनाव का मेल पार्टियों को जनसंपर्क और वोटरों से जुड़ने का बड़ा अवसर देता है। इस बार दिवाली के दौरान सार्वजनिक कार्यक्रमों और घोषणाओं का राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है।
