शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 539 अंक टूटा और निफ्टी 24,100 के नीचे बंद

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भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट देखने को मिली। गुरुवार को कारोबार के दौरान वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दिया। दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। मेटल, पीएसयू बैंक और सीमेंट सेक्टर में बिकवाली का दबाव सबसे अधिक रहा, जिससे प्रमुख सूचकांकों में आधे प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।

कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 539.35 अंक टूटकर 76,933.59 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 116.90 अंक की गिरावट के साथ 24,090.85 पर बंद हुआ। लगातार दूसरे दिन बाजार में कमजोरी रहने से निवेशकों की धारणा कुछ नरम दिखाई दी, हालांकि दिन के दौरान कुछ सेक्टरों और चुनिंदा शेयरों में खरीदारी भी देखने को मिली।

व्यापक बाजार की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 दोनों ही मामूली नुकसान के साथ बंद हुए। इससे संकेत मिलता है कि बड़े शेयरों के मुकाबले व्यापक बाजार में गिरावट सीमित रही और निवेशकों की रुचि कुछ चुनिंदा घरेलू कंपनियों में बनी हुई है।

सेक्टोरल प्रदर्शन में सीमेंट कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा दबाव में रहे। इसके अलावा पीएसयू बैंक, मीडिया, मेटल और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में भी अच्छी-खासी बिकवाली देखने को मिली। दूसरी ओर फार्मा, हेल्थकेयर, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और बाजार की गिरावट को कुछ हद तक संतुलित करने की कोशिश की।

निफ्टी 50 के शेयरों में अदाणी इंटरप्राइजेस, कोटक महिंद्रा बैंक, अदाणी पोर्ट्स, सिप्ला और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के शेयरों ने बढ़त दर्ज की और दिन के प्रमुख गेनर्स रहे। वहीं हिंडाल्को, एचडीएफसी बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, श्रीराम फाइनेंस, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। इन बड़े शेयरों में बिकवाली का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी देखने को मिला।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय बाजार को विदेशी संस्थागत निवेशकों के निवेश और कंपनियों के मजबूत वित्तीय नतीजों से समर्थन मिल रहा है। खासकर मिडकैप कंपनियों के कई सेक्टर घरेलू मांग पर आधारित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय तनाव का अपेक्षाकृत कम असर झेल रहे हैं। यही वजह है कि व्यापक बाजार में गिरावट सीमित रही।

अब निवेशकों की नजर अमेरिका में होने वाले जैक्सन होल सम्मेलन पर टिकी हुई है। इस सम्मेलन में फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन केविन वॉर्श के संबोधन को बेहद अहम माना जा रहा है। उनके बयान से महंगाई, ब्याज दरों की दिशा और भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं। इन संकेतों का असर वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता और उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर पड़ सकता है।

आने वाले कारोबारी सत्रों में घरेलू बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और प्रमुख आर्थिक संकेतकों पर निर्भर रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता लौटती है और घरेलू आर्थिक आंकड़े मजबूत बने रहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में फिर से खरीदारी का माहौल बन सकता है।

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