शेयर बाजार में गिरावट से सेंसेक्स 352 अंक टूटा, IT और तेल-गैस शेयरों में भारी बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार के दौरान काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दिन की शुरुआत से ही बाजार पर दबाव बना रहा और अंत में प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी और आईटी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। हालांकि, बैंकिंग, ऑटो और फार्मा जैसे क्षेत्रों में खरीदारी से बाजार को निचले स्तरों पर कुछ सहारा मिला और शुरुआती गिरावट का बड़ा हिस्सा कम करने में मदद मिली।
कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 352.64 अंक यानी 0.48 प्रतिशत टूटकर 73,246.03 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में 50.90 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,698.85 के स्तर पर आ गया। प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी के बावजूद व्यापक बाजार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा।
सेंसेक्स और निफ्टी में क्यों आई गिरावट?
बुधवार के कारोबार में बाजार की दिशा पर कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों का असर दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल से निवेशकों के बीच लागत और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ीं। तेल की कीमतों में तेजी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अहम होती है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने पर कंपनियों की लागत और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
दूसरी ओर, आईटी शेयरों में भारी बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को बढ़ाया। प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में गिरावट का असर निवेशकों के भरोसे पर भी पड़ा। हालांकि, बाजार में पूरे दिन एकतरफा बिकवाली नहीं रही। कुछ क्षेत्रों में मजबूत खरीदारी दिखाई दी, जिससे सूचकांक अपने निचले स्तरों से उबरने में सफल रहे।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने दिखाई मजबूती
जहां सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए, वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेजी देखने को मिली। इससे संकेत मिला कि निवेशकों की दिलचस्पी बाजार के सभी हिस्सों से पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी और चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जारी रही।
निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 244.80 अंक यानी 0.43 प्रतिशत बढ़कर 57,274.70 पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 166.20 अंक यानी 0.90 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 18,634.90 के स्तर पर पहुंच गया।
व्यापक बाजार में आई यह मजबूती प्रमुख सूचकांकों की गिरावट से अलग तस्वीर पेश करती है। हालांकि, केवल मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में तेजी के आधार पर पूरे बाजार में मजबूत रुझान की पुष्टि नहीं की जा सकती। निवेशकों के लिए शेयर चुनते समय कंपनियों के नतीजों, मूल्यांकन और कारोबार से जुड़ी परिस्थितियों पर ध्यान देना जरूरी रहता है।
ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और फार्मा सेक्टर में खरीदारी
बुधवार को कई सेक्टर आधारित सूचकांकों ने अच्छा प्रदर्शन किया। निफ्टी ऑटो 1.45 प्रतिशत की तेजी के साथ सबसे मजबूत क्षेत्रों में शामिल रहा। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में 1.41 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मीडिया 1.38 प्रतिशत चढ़ा।
हेल्थकेयर और फार्मा शेयरों में भी खरीदारी का रुझान देखने को मिला। निफ्टी हेल्थकेयर 1.15 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा 1.04 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुए। इसके अलावा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.47 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.35 प्रतिशत की तेजी रही।
इन क्षेत्रों में खरीदारी ने बाजार को सहारा देने में अहम भूमिका निभाई। बैंकिंग और ऑटो कंपनियों के शेयरों में मजबूती से प्रमुख सूचकांकों की शुरुआती कमजोरी कुछ कम हुई। फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में तेजी ने भी निवेशकों को चुनिंदा क्षेत्रों में अवसर तलाशने का मौका दिया।
आईटी और तेल-गैस शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव
बाजार में गिरावट का सबसे अधिक असर तेल-गैस और आईटी क्षेत्रों में देखने को मिला। निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स 2.27 प्रतिशत गिरकर दिन के सबसे कमजोर सेक्टरों में रहा। निफ्टी आईटी में 1.98 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
इसके अलावा निफ्टी कमोडिटीज 0.95 प्रतिशत, निफ्टी एनर्जी 0.89 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 0.89 प्रतिशत टूटे। इन क्षेत्रों में बिकवाली ने बाजार की तेजी की संभावनाओं को सीमित किया।
आईटी शेयरों पर दबाव के पीछे निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक कारोबारी परिस्थितियों को लेकर चिंताएं अहम कारक रहीं। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने ऊर्जा और तेल-गैस से जुड़े शेयरों में उतार-चढ़ाव बढ़ाया। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम लेने के बजाय कंपनियों और क्षेत्रों के प्रदर्शन का आकलन करते नजर आए।
सेंसेक्स के इन शेयरों में रही तेजी
सेंसेक्स में शामिल कई कंपनियों के शेयर गिरावट वाले बाजार में भी बढ़त के साथ बंद हुए। लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी), ट्रेंट, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), एक्सिस बैंक, इंडिगो, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी, बजाज फाइनेंस और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में तेजी दर्ज की गई।
इन कंपनियों में खरीदारी से संकेत मिला कि बाजार में निवेशक चुनिंदा शेयरों पर भरोसा बनाए हुए थे। बैंकिंग और ऑटो क्षेत्र की कंपनियों में मजबूती ने भी व्यापक बाजार में गिरावट के असर को कुछ हद तक संतुलित किया।
हालांकि, किसी एक कारोबारी सत्र में शेयरों की तेजी या गिरावट को उनके भविष्य के प्रदर्शन का निश्चित संकेत नहीं माना जा सकता। निवेश के फैसले लेते समय कंपनी के वित्तीय नतीजों और लंबी अवधि की संभावनाओं को समझना जरूरी है।
रिलायंस और प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयर फिसले
दूसरी ओर, सेंसेक्स के कई बड़े शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। रिलायंस इंडस्ट्रीज, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, टीसीएस और एचसीएल टेक के शेयरों में कमजोरी रही। भारती एयरटेल, टाटा स्टील, बजाज फिनसर्व, इटरनल, बीईएल, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन, आईटीसी और एचयूएल के शेयर भी नुकसान में रहे।
बड़े बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों के शेयरों में गिरावट का असर प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा। खास तौर पर आईटी कंपनियों में बिकवाली ने बाजार की दिशा को प्रभावित किया। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े शेयर में कमजोरी ने भी निवेशकों का ध्यान खींचा।
अमेरिकी घटनाक्रम और फेड की नीति पर निवेशकों की नजर
घरेलू बाजार के निवेशक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी नजर बनाए हुए हैं। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से जुड़े घटनाक्रम और भू-राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर स्पष्टता की तलाश बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकती है। वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक आम तौर पर जोखिम वाले निवेश को लेकर अधिक सतर्क हो जाते हैं।
आने वाले समय में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति से जुड़े संकेत भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। ब्याज दरों, महंगाई और आर्थिक विकास को लेकर केंद्रीय बैंक का रुख वैश्विक निवेश प्रवाह तथा शेयर बाजारों की धारणा पर असर डाल सकता है।
आगे बाजार की चाल किन बातों पर निर्भर करेगी?
बुधवार का कारोबार बताता है कि बाजार में फिलहाल अलग-अलग क्षेत्रों के बीच प्रदर्शन का अंतर बना हुआ है। एक तरफ सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए, तो दूसरी ओर मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में तेजी रही। बैंकिंग, ऑटो और फार्मा में खरीदारी ने सहारा दिया, जबकि आईटी और तेल-गैस शेयरों में दबाव बना रहा।
आगे निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बाजारों के रुझान, अमेरिकी फेड के नीतिगत संकेतों और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की स्थिति में जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय जोखिम क्षमता, निवेश की अवधि और कंपनियों की बुनियादी स्थिति को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा।
